ये काम करिए और अपनी सजा को बदलिए कैसे? आईये जानें।

Radha soami satsang beas- संतमत के अनुसार दुनिया में जितनी भी देखे जाने वाली वस्तुएं मायावी हैं , नाशवान हैं और मिथ्या हैं। अपनी सजा से छुटकारा पाने के लिए संत सतगुरु की शरण में जाना होगा। इस दुनिया को समझने के लिए पूर्ण संत सतगुरु से प्राप्त नामदान की नियुक्ति से इन सब पर विजय प्राप्त करनी होगी।

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सबसे पहले हमें अपने अंदर नम्रता, दीनता और सेवा भावना लाना अनिवार्य है क्योंकि यही सब करने से हमारे मन में कुछ रूहानियत इसके बारे में विचार उत्पन्न होंगे। फिर हमें किसी ऐसे स्थान जहां पर अच्छे प्रवचन होते हों, सत्संग होते हों, सतगुरु के विचार सुनने को मिले वहां पर हमें जाने चाहिए। सतगुरु के बताए हुए वचनों पर हमें अमल करना चाहिए। क्योंकि सतगुरु तो वही बताते हैं जो उन्होंने अनुभव किया है और उस अनुभव के द्वारा ही वह परमात्मा से जा मिले हैं। इसलिए हमें उनकी वचनों पर जरूर ध्यान देना है। हर बात को बड़ी गहराई से समझने की जरूरत है। अगर हम मन के बारे में समझ जाएंगे तो रूहानियत में हमारा रास्ता साफ हो जाएगा।

बाबा गुरिंदर सिंह जी

अपनी सजा बदलनी है तो करें ये काम

जब भी, कहीं भी, कभी भी हमें सतगुरु के वचन सुनने को मिले हमें सुनने चाहिए। सन्त बताते हैं कि सत्संग सुनने से सजा में भी बदलाव हो सकता है। एक कहानी है दो चोरों की। जब दोनों चोरी किया करते थे। उनमे एक चोर थोड़ा नरम स्वभाव का था। दोनों साथ मिलकर चोरी करते थे। एक रात चोरी करने के लिए घर से निकले। वे दोनों वहां पहुंचे जहां पर राजा के महल में सत्संग का आयोजन किया गया था। वहां पर काफी लोग सत्संग सुन रहे थे। तो एक चोर ने दूसरे चोर से कहा कि भाई आज तो राजा के महल में चोरी करने का अच्छा अवसर है।

दूसरे चोर ने कहा कि राजा के महल में चोरी करना तो मौत को दावत देना है, परंतु पहला चोर मानने को राजी ना हुआ और वह चोरी करने के लिए चला गया। परंतु दूसरा चोर चोरी ना करके राजा के दरबार में सत्संग सुनने के लिए चला गया। फिर सुबह हुई, पता चला कि राजा के महल में चोरी हो गई है। राजा ने सभी सैनिकों को आदेश दिया कि चोर जो भी हो, कहीं पर भी हो उसे पकड़कर उपस्थित किया जाए और उसको सूली पर चढ़ा दिया जाए।

काँटा लगा और आज पूरी

यह सुनकर के दूसरे चोर को बड़ा दुख हुआ और वह दौड़ता हुआ पहले चोर के पास जाने की कोशिश करने लगा। दौड़ते-दौड़ते उसके पैर में कांटा लगा और पैर में आर-पार हो गया। फिर भी वह उसके दोस्त के पास पहुंचा और कहने लगा कि भाई राजा ने तो तुम्हें फांसी पर चढ़ाने का हुक्म दिया है। उस चोर को पकड़ लिया और राजा के दरबार में पेश किया गया और उसे सूली पर चढ़ा दिया गया।

इसका मतलब यह है की सत्संग में इतनी शक्ति है कि वह आपके कर्मों में बदलाव ला सकते हैं। आप की सजा में भी बदलाव कर सकते हैं। सोचो- सतगुरु की शरण में जाने से आपका क्या काम नहीं हो सकता? आपको सदा के लिए इन्हें दुखों से छुटकारा हो सकता है। इसलिए संत की शरण में जाएं। सतगुरू के वचन सुने और उन पर अमल करते हुए भजन-सुमिरन करें। प्रभु को परमात्मा को प्राप्त करें। अपनी आत्मा को परमात्मा से मिला करके अपने मनुष्य जन्म का फायदा उठाएं।

।।राधास्वामी।।

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