यही अंतिम दौर है इस दौलत यानी भजन-सुमिरन के लिए: बाबाजी

Radha Soami- बाबा जी आपने सत्संग में बार-बार हमें भजन-सुमिरन करने को कहते रहते हैं, क्योंकि यह अंतिम दौर है जिसमे आप भजन-सुमिरन करके परमात्मा को प्राप्त कर सकते हो। यह रूहानी दौलत है हर किसी के पास परंतु उस को जागृत करना, प्राप्त करना यह भाग्यशाली जीवों के ही हिस्से होता है।

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अगर इस जन्म में हम यह शुभ कार्य नहीं कर सकते तो फिर

इसलिए हमें जो परमात्मा की दया मेहर से मनुष्य जन्म जो मिला है, हमें इसका फायदा उठाना चाहिए और यह बहुत जरूरी है। क्योंकि मनुष्य जन्म चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद मिलता है। ना जाने कितने कीट-पतंगे, कीड़े-मकोड़े, जानवर बने हैं। जब कहीं जाकर हमें यह मनुष्य जन्म प्राप्त हुआ है। अगर इस जन्म में हम यह शुभ कार्य नहीं कर सकते तो फिर हमें नहीं पता कि किस जन्म में, कहां जा करके, हमें जन्म लेना पड़ेगा कौन सी योनि में भटकना पड़ेगा।

बाबा गुरिंदर सिंह जी

इसके लिए हमें अभी से सोच-विचार करने की आवश्यकता है। हमें बार-बार यह जन्म नहीं मिलने वाला, इसलिए अपने गुरु के वचनों पर अमल करो, भजन सुमिरन करो, बिना नागा करो, सुबह-शाम करो। जब भी, कहीं भी जैसे भी समय मिले हमें उसका उचित फायदा उठाना चाहिए। संत जितने भी हुए हैं उन सभी ने अपने अनुभव के अनुसार हमें बताया है कि हमें एक पल का भी भरोसा नहीं है कि हम कब तक जिंदा रहेंगे। इसलिए हमें कल का इंतजार ना करते हुए, इसी वक्त हमें गुरु के वचनों पर अमल करना शुरू कर देना चाहिए और भजन-सुमिरन करना चाहिये।

भजन-सुमिरन से होगा ये हासिल

संत बताते हैं कि हमें बाहरी पूजा-पाठ जब तक आदि से बचना चाहिए, क्योंकि इन सब से हमें कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। हमें जो कुछ भी मिलेगा रूहानी तरिके से अपने अंदर मिलेगा, आंखों के पीछे मिलेगा, दसवें द्वार पर मिलेगा। इसलिए हमें अपने ध्यान को एकत्रित करना चाहिए। तीसरी तिल पर एकाग्र करने चाहिए। जिसके द्वारा ही हम उस मधुर धुन को सुन सकते हैं। उसका असली आनंद प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए हमें अपने अभ्यास को उचित और सही तरीके से अपनाना चाहिए। अभ्यास को बढ़ाना चाहिए। इसलिए हमें बार-बार यही दोहराया जाता है कि भाई भजन-सुमिरन करो और प्रभु को प्राप्त करो।

।।राधास्वामी।।

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