सेवा भावना, हक-हलाल की कमाई से शान्ति कैसे मिले?- आईये जानें।

Radha Soami- इस संसार में अपने आपको अगर संतुष्ट करना है, तो हक-हलाल की कमाई में लगे रहो, सेवा भावना रखो। अपने पूर्ण संत सतगुरु की शरण में जा करके उनसे नाम की युक्ति प्राप्त करो और भजन-सुमिरन में लगे रहो। यही एक रास्ता है जिसके द्वारा हम इस संसार में संतुष्ट रह सकते हैं। कुछ हद तक शांति प्राप्त कर सकते हैं।

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उस महापुरुष की संगत

सबसे पहले हमें उस व्यक्ति की या उस महापुरुष की संगत करनी है, जिसके द्वारा हमें वह रास्ता मिल सके। जिसकी हमें तलाश है। अब बात आती है कि हमें किस रास्ते की जरूरत है। जरूरत है हमें रूहानियत के रास्ते की, सच्चाई के रास्ते पर चलने की, जहां से हमें परमात्मा प्राप्ति का रास्ता प्राप्त हो, उस रास्ते की तलाश है। वह रास्ता किसी संत-महात्मा की शरण में जाकर ही प्राप्त कर सकते हैं।

बाबा गुरिंदर सिंह जी

बाबाजी आपने सत्संग में फरमाते रहते हैं कि हमें अपने विचारों में सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। क्योंकि आपकी सकारात्मक सोच ही आपकी दिशा को बदल सकती है। आप एक अच्छे सफर पर निकल सकते हो। हमें कभी किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यह सोच रखने से हमारे विचारों में नकारात्मक विचार आते हैं और हम अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। इसलिए हमें सभी लोगों से प्रेम रखना चाहिए। सभी को आदर करना चाहिए, चाहे छोटा हो या कोई बड़ा। सभी को सम्मान जिंदगी जीने का अधिकार है। हमें कभी निंदा नहीं करनी चाहिए।

संपर्क में सभी जीव कैसे करते हैं कर्मों का भुगतान

संत बतातेे हैं की हमारे संपर्क में जो भी जीव आते हैं। उनका हमारे कर्मों से गहरा संबंध होता है, क्योंकि जो भी व्यक्ति यह जीव हमारे साथ समय बिताते हैं उसके कर्मों का लेखा-जोखा जुड़ा होता है और अपने कर्मों को पूरा करने के लिए हमारे संपर्क में आता है। इसलिए हमें किसी भी जीव या व्यक्ति को कष्ट नहीं देना चाहिए। उसके साथ सेवा-भावना, प्रेम भावना बहुत जरूरी है। नहीं पता परमात्मा किस रूप में हमारे कर्मों का नाश कर दे और हम अपने बुरे कर्मों से छुटकारा दिला दें।

गुरु की कृपा धीरे-धीरे अपना इतना रंग ले आती है कि गुरु अपने शिष्य को भी अपने ही समान बना देता है। हमारी कर्मो की गांठो को वह रोज़ एक-एक कर खोलता रहता है, और हमे पता भी नहीं चलता, हमारा कर्मो का सिलसिला अचानक समाप्त कैसे हो गया। युगो-युगो से सतगुरु की दया अपने जीवों पर इसी प्रकार बरसती आ रही है और आज भी कुछ भाग्यशाली जीवो पर बरस रही है।

आओ, नीति को समझें

हर तरीके से समझा कर अंत में बाबाजी चेता रहे हैं की यह अंतिम अवसर है। इसका का फायदा उठाओ। हर जीव के प्रति सेवा भावना, हर जीव से प्रेम, हर जीव का सम्मान करना चाहिए। हमें अपने जीवन को सकारात्मक श्रेणी में रखना चाहिए। हमें हक-हलाल की कमाई से गुजारा करना चाहिए। यह सब करने से हम किसी की निंदा के भागीदार नहीं बनेंगे और ना हम किसी की निंदा करेंगे। क्योंकि हमारी सोच सकारात्मक होगी। उससे परमात्मा प्राप्ति की राह आसान होती है।

।।राधास्वामी।।

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