सत्संग जानें से ये काम सिद्घ होता है, क्या आपको पता है?

Radha Soami -गुरु जी फ़रमाते हैं कि सत्संग जैसा भी हो, कहीं पर भी हो और कोई भी कर रहा हो। उसका हमेशा आदर करना चाहिए और हमें उस उस सत्संग में भाग लेना चाहिए। क्योंकि सत्संग ही एक ऐसी कड़ी है। जिसके द्वारा रूहानियत के पथ पर चलकर परमात्मा की प्राप्ति की जा सकती है। उन प्रवचनों में हमेशा सच के बारे में बताया जाता है। प्रभु की प्राप्ति का रास्ता बताया जाता है तो हमें गुरु का सदैव गुणगान करना चाहिये।

बाबा गुरिन्दर सिंह जी

सत्संग की विशेषता

संत हमेशा अपने सत्संग में केवल प्रभु प्राप्ति के बारे में ही बतलाते हैं। वहां किसी की निंदा नहीं की जाती। कभी किसी के बारे में बुरा-भला नहीं कहा जाता और ना ही वहां पर किसी धर्म, मजहब, जाति आदि के बारे में बतलाया जाता है। वहां केवल केवल आपसी प्रेम भावना और सेवा भावना के बारे में सिखाया जाता है। वहां हो रहे पर वचनों सेे हमें बहुत ज्ञानवर्धक बातें मिलती हैं, जिसके द्वारा हम रूहानियत की एक-एक मंजिल के बारे में समझ सकते हैं, सोच सकते हैं।

बाबाजी बताते हैं कि सत्संग में जाने से मन झुकना सीखता है, मन में नम्रता आती है, मन एकाग्र होने लगता है और जब मन एकाग्र होने लगेगा। तो हमें अपने निजघर जाने में बहुत सहायता प्राप्त होती है। मन जब एकाग्र होना सीख जाएगा तो हम परमात्मा को प्राप्त कर लेंगे। मन को शांत करने का केवल एक मात्र यही रास्ता है। हमें गुरुजी का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जब भी समय मिले, कहीं पर भी मिले, हमें सत्संग में जाना चाहिए। बाबाजी अक्सर फरमाते हैं कि सत्संग में जाने से सजा एक छोटी सी चोट के द्वारा पूरी की जा सकती है अर्थात सत्संग में जाने से सूली की सजा सुल(कांटा) से काटी जा सकती है।

बाबाजी

सत्संग से रूहानियत की खोज

संतो के मतानुसार सत्संग में जाने से रूहानियत की पहचान भी की जा सकती है ।प्रवचन सुनने से जो हमें ज्ञान प्राप्त होता है। उसी के आधार पर हम यह भी जान लेते हैं कि जो सत्संग फरमाते हैं, वह गुरु जो सत्संग करता, हमारा पूर्ण गुरु हो सकते हैं या नहीं! पूर्णगुरु ही हमें अपने निजघर पहुंचा सकते हैं। अगर हम आधे-अधूरे किसी को हम अपना गुरु बना लेते हैं तो यह संभव नहीं है कि वह हमें अपने परमधाम पहुंचा सके।

इसीलिए बाबाजी फ़रमाते रहते हैं कि हमें किसी पूर्ण संत-सतगुरु की शरण में जाना चाहिए और उनसे नाम कि युक्ति प्राप्त करनी चाहिए। क्योंकि पूर्ण संत ही हमें असल मकसद तक पहुंचा सकते हैं और एक यही अवसर है जिसके द्वारा हम मनुष्य जन्म का लाभ उठा सकते हैं। तो आइए, किसी पूर्ण सतगुरु की शरण में जाएं और उन से नामदान प्राप्त करके भजन-सुमिरन करें। अपने परमपिता परमात्मा को प्राप्त करें।

आओ, अमल करें

हमें बाबा जी से प्राप्त नामदान पर अमल करना चाहिए और हर रोज बिना नागा भजन करना चाहिए। दिन में ढाई घंटे सुमिरन करना रुहानियत में अनिवार्य बताया गया है। इसलिए हमें सिमरन पर ज़ोर देना चाहिए। एक यही अवसर है, भजन बंदगी करेंगे तो परमात्मा को प्राप्त कर लेंगे। तो आइए, अमल करें, भजन सुमिरन करें।

।।राधास्वामी।।

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