संतों का यह उपदेश आपके जीवन को बदल सकती है। ये है उपदेश: बाबाजी

Radha Soami Ji – संतों महात्माओं के विचार हमारे जीवन के लिए बहुत महत्व रखते हैं। संतो के विचार अपने जीवन को बदल सकते हैं। हम महात्माओं के दिए गए उपदेश पर अमल करके अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकते हैं। जिस काम के लिए आए हैं उस काम को पूरा कर सकते हैं। इसलिए हम वहां संतों के दिए गए उपदेशों पर अमल करें।

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गुरु सौ कदम आगे आकर के आपने जीव का स्वागत करते हैं।

महात्मा फरमाते हैं कि हमें किसी पूर्ण गुरु की शरण लेनी चाहिए। उनके हुक्म अनुसार रहनी और करनी को रखना चाहिए। हमें चाहिए की हम उनके द्वारा बताए गए उपदेश पर चलें। संत फरमाते हैं अगर जीव एक कदम गुरु की तरह से बढ़ाते हैं तो गुरु सो कदम आगे आकर के आपने जीव का स्वागत करते हैं। संत बताते हैं कि गुरु के रूप में आए हुए, महात्मा हमारे जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए आते हैं और अपने परमात्मा से बिछड़े हुए जीव को मिलाने के लिए आते हैं। परंतु हम हैं कि विषय विकार में फंसे हुए हैं।

अगर हम यह अंतिम अवसर चूक गए तो फिर ऐसा अवसर पर नहीं आने वाला

गुरु महात्मा फरमाते हैं की अगर हम यह अंतिम अवसर चूक गए तो फिर ऐसा अवसर पर नहीं आने वाला और हम इस राशि के जेलखाने में भटकते रहेंगे। ऐसे ही कीड़े-मकोड़े, पक्षी आदि बनकर के चौरासी के चक्कर लगाते रहेंगे, कष्ट उठाते रहेंगे। गुरु फरमाते हैं कि भाई इस अवसर का लाभ उठाओ।

हमें सत्संग में बार-बार बताया जाता है कि ऐसे चौरासी से छूटने का केवल एक ही रास्ता है और वह है अपने परमात्मा की भजन-बंदगी करना और वह कैसे हो सकती है? वह किसी पूर्ण संत सतगुरु की शरण प्राप्त करके की जा सकती है। उनसे नामदान की युक्ति प्राप्त करके हम अपने असल मकसद को में कामयाब हो सकते हैं।

जब हम अपने ध्यान को तिल पर एकाग्र करेंगें।

हमें बाबाजी के हुक्म के अनुसार हर रोज कम से कम ढाई घंटे का भजन सुनने करना बहुत जरूरी है। अपने ध्यान को तीसरे तिल पर एकाग्र।करना बहुत जरूरी है, जब हम अपने ध्यान को तिल पर एकाग्र करेंगें। तब जाकर हम कहीं अपने परमात्मा के दर्शन कर पाएंगे। जब हम अंतर में अपने परमात्मा के दर्शन करेंगे, उस सूरत धुन को सुनेंगे उस दौरान हमें उस अमृत रस पीने का आनंद मिलेगा। हम चौरासी के जेलखाने से आजाद हो जाएंगे।

ये भी जरूरी

तो आओ! हम सब मिलकर गुरु के हुक्म के अनुसार चले। बाबा जी के बताए गए रास्ते पर चलें। हक-हलाल की कमाई करें, सेवा करें, सुमिरन करें। और अपनी मंजिल तक पहुंचे ताकि बार-बार इस चौरासी के चक्कर न लगाना पड़े।

।।राधास्वामी।।

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