संतों का सबसे उत्तम संदेश, जो शायद अपने नही जाना: राधास्वामी

Radha Soami -सभी संत-महात्माओं का एक ही उपदेश और एक ही संदेश है की परमात्मा एक है। उसको प्राप्त करने का रास्ता भी एक है। हम परमात्मा को उस नामदान कि युक्ति के जरिए प्राप्त कर सकते हैं और उस युक्ति को हम पूर्ण संत सतगुरु से प्राप्त कर सकते हैं। हम नामदान के द्वारा ही उस परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं।

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इसलिए दुख और मुसीबत उठानी पड़ती है

संतों के इस संदेश मुताबिक रुहानियत के रास्ते पर का चलना बहुत आसान है, परंतु हम अपने मन की कहे में चलने से अपने सांसारिक फायदे देखते हुए, जीव इस रूहानियत के रास्ते को मुश्किल बना लेते हैं। दुनियावी इच्छाओं को पूरा करने के लिए हमें बहुत दुख और मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। परंतु रूहानी पर चलने के लिए हमें किसी मुसीबत का सामना नहीं करना पड़ता।

किसी प्रकार का कोई दुख नहीं उठाना पड़ता है। फिर भी हम इस आसन का से दूरी बनाते हैं। हमें केवल उस परमात्मा की भक्ति करनी है। गुरु के बताए अनुसार भजन-सिमरन करना है। अपने मन को एकाग्र करना है। सबसे आसान और उचित रास्ता है, अपने आपको भजन-सिमरन में लगाओ और अपने रूहानी के मार्ग को आसान बनाओं।

बाबाजी

रूहानियत में तरक्की के लिए हमें क्या करना है! केवल अपने सतगुरु द्वारा बताए गए वचनों पर अमल करना है। हमें हक हलाल की कमाई करनी है। हमें बड़े-बुजुर्ग, बच्चे, दिव्यांग और जरूरतमंद व्यक्तियों, जीवो आदि की सहायता करनी है। उनकी सेवा करनी है। हमें अपने अंदर सेवा भावना जागृत करनी है। हमें हर किसी के लिए एक समान होने प्रयास करना है। हमारे लिए सभी जीव-जंतु, पशु-पक्षी एक समान है।

गुरु के संदेश का रखे ध्यान

सत्संग में बाबाजी अक्षर फ़रमाते हैं की हमें गुरु की बातों का ध्यान रखना चाहिए। हम उन बातों का ध्यान करेंगे, उनके संदेश को मानेंगें, गुरु के बताए हुए वचन पर अमन करेंगे तो हमारा हर काम आसानी से बनता चला जाएगा। हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति आसानी से हो जाएगी। हमें कभी किसी का दिल नहीं दुखाना, हमें कभी नशा नहीं करना, कभी मांस नहीं खाना, हक-हलाल की कमाई करते हुए अपने जीवन को व्यतीत करना है। इनके करने से ही हमारे अंदर नम्रता का आएगी। यही है संतो का संदेश। अपने मन एकाग्र कर सकते हैं और परमात्मा प्राप्ति में सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए सतगुरु के कहे अनुसार हमें अपने आपको ढालना है। हमें गुरु की हर बात का आदर करना है।

आओ, बाबाजी की इन बातों पर अमल करें

आइए हम सब अपने बाबाजी की इन सब बातों पर अमल करें, विचार करें और उनको अपनी करनी में जाहिर करें। हमें हर रोज किसी न किसी जीव की, व्यक्ति की सेवा करनी है, उसकी सहायता करनी है ताकि अपने अंदर एक सेवा भावना जागृत रहे। हमें सतगुरु से प्राप्त नामदान की युक्ति पर अमल करना है। हमें ज्यादा से ज्यादा भजन करना है, क्योंकि यही एक ताले की चाबी है जिसके द्वारा हम उसके परमात्मा के दरबार में जा सकते हैं। इसके अलावा और कोई भी ऐसा रास्ता नहीं है कि हम इस चौरासी जेलखाने से बाहर निकल सके। इसलिए ज्यादा से ज्यादा भजन-सुमिरन करें।

।।राधास्वामी।।

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