संतमत अथवा गुरुमत का असल संदेश क्या है?

Radha Soami- संत महात्मा फरमाते हैं कि इस संसार में हमारे सामने दो मार्ग हैं। हम लोग गुरु मत के अनुसार जिसे गुरुमत कहा जाता है या तो अपने मन के कहे अनुसार चल सकते हैं जिसे मनमत कहा जाता है, या पूर्ण गुरु के उपदेश पर चलकर प्रभु को प्राप्त करने का यत्न कर सकते हैं जिसे गुरमत अथवा संतमत कहा जाता है। हर जीव अपनी बुद्धि के अनुसार यही समझता है कि वह गुरु मत पर चल रहा है।

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हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि सभी धर्मों के मनुष्य अपने-अपने धर्म के अनुसार सभी चीजों को अपनाते हैं। अगर वह सब अपने धर्म के अनुसार पूजा-पाठ नहीं करते या उनके धर्म में कोई साथ रखने योग्य वस्तु अगर नहीं रखते तो वे गुरु का जीवन नहीं कहला सकता। यह सभी धर्मों का कहना है।

संतमत में ये काम करना ज़रूरी है

लेकिन संतमत में जीव को अपने आप को पूरी तरह से समर्पित करना पड़ता है। उसके हुकुम में चलना पड़ता है। जितने भी संतमत में संदेश दिए हैं उन सब में स्पष्ट लिखा गया है, स्पष्ट बताया गया कि गुरुमत में केवल गुरु के हुकुम में चलना अनिवार्य है। गुरु हमें वही शिक्षा देते हैं जो उन्होंने अनुभव किया है। गुरुमत में मतलब अपने आप को गुरु के प्रति पूरी तरीके से समर्पित कर देना, यह सब कहलाता है गुरुमत।

गुरविंदर सिंह बाबा जी

कुछ लोग मूर्तिपूजा, तीर्थयात्रा तथा पवित्र नदियों व सरोवर में स्नान करना ही गुरमत मानते हैं। कुछ इसलिए अपने को गुरमत के अनुयाई समझते हैं, क्योंकि वे गीता, रामायण आदि धार्मिक ग्रंथों का पाठ, गायत्री मंत्र आदि का जाप करते हैं। इस तरह कुछ लोग व्रत, ब्रह्मचर्य, आत्मसयंम तथा हटकर्मों को परमात्मा की प्राप्ति का साधन मानते हैं। जबकि यह केवल बाहरी पूजा-पाठ है। इन सब को करने से हम केवल अपने आप को संतुष्ट करने की कोशिश करते हैं, परंतु असली मकसद पर पहुंचने के लिए हमें केवल और केवल गुरु की शरण में जाना ही पड़ेगा।

तीसरे तिल पर जाने से पता चला इस बात का

जब हम अभ्यास करके मन और आत्मा को अष्टदल कमल अर्थात तीसरे तिल पर केंद्रित कर लेते हैं, तो उस स्थान पर लगातार हो रहे अनहद शब्दरूपी दिव्य संगीत को सुनने लग जाते हैं, जब जाकर हमें पता चलता है कि असली मकसद क्या है और हम किस लिए इस संसार में आए हैं। हमें किसलिए इस मनुष्य मिला है। यही अंतिम अवसर है। भजन सुमिरन करेंगे, गुरु के हुक्म के अनुसार चलेंगे। नेक नीति पर बने रहेंगे तो हम परमात्मा को प्राप्त कर लेंगे। तो आइए सब मिलकर के गुरु के हुक्म के अनुसार गुरुमत में रहते हुए भजन-सुमिरन करें और परमात्मा को प्राप्त करें।

।।राधास्वामी।।

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