संत कहते हैं रूहानी रास्ता आसान। चलना हम पर निर्भर करता है: परमार्थ

Radha soami- संत रूहानियत पर चलकर परमात्मा को प्राप्त कर चुके हैं और वही रास्ता संत हमें समझाते हैं, बताते हैं कि भाई इस रास्ते पर चलो और परमात्मा को प्राप्त करो। आओ हम इन वचनों पर अमल करें।

परमात्मा को पाने के लिए हमें क्या करना है। यह हमारे ऊपर निर्भर

बाबाजी

संत-महात्मा हमें अपने अनुभव के द्वारा समझाते हुए बहुत कुछ हमारे सामने रख देते हैं। उन पर अमल करना हमारा कर्तव्य बनता है, कि परमात्मा को पाने के लिए हमें क्या करना है। यह हमारे ऊपर निर्भर है। रूहानियत पर चलना बहुत आसान है। परंतु हम उसको ना समझकर कठिन बना देते है। उस पर हमें क्या करना चाहिए। संत बताते हैं कि किसी पूर्णसंत की शरण में जाओ।

रूहानियत के बारे में एक पूर्ण संत ही हमें समझा सकते कि परमात्मा को पाना बहुत ही आसान है। लेकिन मनुष्य की कमजोरियों के कारण है कि वह रूहानियत के इस रास्ते पर चलना नहीं चाहता। मनुष्य परमात्मा से इस सांसारिक चीजों की कामना करता है। जबकि हमें परमात्मा से परमात्मा को मांगना चाहिए। क्योंकि उस परमात्मा में सबकुछ समाया हुआ है।

वह चाह कर भी इस माया के जाल से नहीं छूट सकता, क्योंकि

मनुष्य इस मायावी खेल में फंसा हुआ है। वह चाह कर भी इस माया के जाल से नहीं छूट सकता, क्योंकि आत्मा का स्वभाव बहुत नम्र होता है। उसके ऊपर मन का पहरा है। वह चाह कर भी इस जेल खाने से नहीं छूट पा रही है क्योंकि आत्मा को परमात्मा से मिलाने के लिए किसी पूर्णगुरु की चरण जरूरी है जो कि मनुष्य करना नहीं चाहता।

यह मनुष्य जन्म इस माया के जेल खाने से छूटने का आखरी अवसर है। हम रूहानियत के रास्ते पर चलेंगे। गुरु के हुक्म के अनुसार कार्य करेंगे, भजन-सुमिरन करेंगे तो हम इस जेलखाने से आजाद हो सकते हैं और परमात्मा की शरण में जा सकते हैं।

।।राधास्वामी।।

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