सबसे विनाशकारी है ये काम। इससे बचने के लिए उठाएं ये कदम: बाबाजी

Radha soami- संत-महात्मा अपने अनुभव के अनुसार विनाशकारी काम के बारे उपदेश सुनाते हैं और उनके जीवन में जो घटनाएं घटी हैं, उनका वर्णन हमारे सामने करते हैं। हमें काम कितना विनाशकारी है इसके बारे में समझा रहे हैं। काम वासना इतना विनाशकारी है कि आपके जीवन भर की तपस्या को पल भर खत्म कर सकती है।

Guru di bakshish

एक पहुंचे हुए ऋषि की कहानी

बाबा जी हमें एक ऋषि की कहानी सुनाते हैं जिसमें विनाशकारी काम के बारे में बताया है। यह कहानी किसी ऋषि की है जिसने कई सालों तक तपस्या की उसके शिष्य और दूसरे ऋषि मुनि उसे बहुत बड़ा समझने लगे थे। जंगलों और गुफाओं के एकांत में रहकर कई साल तक तपस्या करने के बाद वह अपने गांव लौट रहा था। नदी पर पहुंचकर उसने एक मछुआरे से कहा: कि वह उसे नदी पार ले जाए। मछुआरा अपने काम में लगा हुआ था, इसलिए उसकी बेटी ने कहा कि वह ऋषि को नदी के पास छोड़ आएगी।

जब ऋषि का मन हुआ आकर्षित

नदी पार करते समय ऋषि मछुआरे की बेटी पर आकर्षित हो गया। वह उसे काम वासना भरी नजरों से देखता रहा और आखिर मन वासना के अधीन हो गया। मन की पल भर की कमजोरी ने ऋषि को पतन की हद पर पहुंचा दिया। मन के बेकाबू होते ही उसकी रूहानी तरक्की खत्म हो गई और सालों-साल एकांतवास में गहन साधना करने के बाद उसे हासिल हुई थी। वह फिर से उसी अवस्था में पहुंच गया जहां से उसने शुरुआत की थी। यह सब मन में उठी काम वासना पर काबू न करने के कारण हुआ। सोचो! कितना विनाशकारी है यह काम वासना।

बाबा गुरिंदर सिंह जी

इसीलिए मन के अधीन होने के बजाय हमें मन पर काबू रखना है। जब मन डांवाडोल होने लगे तो उसी दौरान हमें अपने मन को भटकने से रोकने के लिए लगातार सिमरन करना चाहिए। हमारे मन को स्थिर रखा जा सकता है केवल भजन सुमिरन के द्वारा। इसलिए सुमिरन करते रहिए। जिंदगी में आने वाले झटकों से बचा सकता है। मन बेकाबू ना हो, इन सब पर काबू पाया जा सकता है।

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महात्मा बुद्ध के विचार

महात्मा बुद्ध ने कहा है: ” यदि किसी के घर में रोशनी है तो चोर वहां नहीं जाते और अगर चौकीदार जाग रहा है तो चोर उधर झांकने की कोशिश भी नहीं करेंगे।” समझो हमारा मन घर है। सिमरन रोशनी है। बुरे विचार चोर हैं। इस घर को रोशनी हमेशा रोशन रखो। लगातार सिमरन करते रहो ताकि चोर यानी दुनियावी आकर्षण और बुरे विचार इस मनरूपी घर के अंदर नहीं आएं। सिमरन की रोशनी इन चोरों को, बुरे विचारों को अंदर दाखिल होने से रोक लेंगी।

इसीलिए बाबा जी बार-बार जोर देते हैं कि भाई भजन-सुमिरन करो। अपने अंदर रोशनी को कायम रखो, ताकि आपके अंदर पूरे विचार न आएं। काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार का कोई चोर आपके मनरूपी में घर में ना घुसे। इसलिए ज्यादा से ज्यादा पल-पल सांस के साथ भजन-सिमरन करते रहो। अपने परमात्मा की प्राप्ति में जरा सी भी देरी ना करो। सिमरन करो सिमरन।

।।राधास्वामी।।

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