रूहानियत में वी.आई.पी की नहीं, इनकी जरूरत होती है: संतमत

Radha soami- संत हमें अपने संतमत के अनुभव अनुसार हमें समझाने की कोशिश करते हैं कि हमें अपने व्यवहार में विनम्रता कैसे लानी है। हमें सतगुरु की हुकुम के अनुसार ही अपनी जीवन को ढालना होगा। अपने सतगुरु से नजदीकी बहुत जरूरी है। नजदीकी किस तरीके से होनी चाहिए, वह हमें समझाने की कोशिश कर रहे हैं।

Radhasoami shabad

महत्वपूर्ण नहीं यहां अमल करना जरूरी

यहां किसी के महत्वपूर्ण होने का सवाल नहीं है बल्कि सतगुरु के वचन सुनकर, उन पर अमल करके, मिल-जुलकर अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ने की बात है। ऐसा कहा जाता है: “सतगुरु आप के समान हैं। ज्यादा नजदीक खड़े रहोगे तो जल जाओगे, ज्यादा दूर रहोगे तो गर्माहट नहीं पहुंचेगी।”

“ज्यादा नजदीक” होने से जलने का खतरा है! “नजदीकी” के कारण हो सकता है कि शिष्य सतगुरु को सतगुरु के रूप में न देखे। उस स्थिति में शिष्य का प्रेम और विश्वास आग में जलकर राख हो जाते हैं।

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इसके बिल्कुल उलट, “ज्यादा दूर रहोगे तो गर्माहट नहीं पहुंचेगी”, यह बाहरी दूरी की बात नहीं है। दूर रहने का मतलब है हम संतमत के उसूलों पर नहीं चलते या फिर मार्ग से भटक जाते हैं, उपदेश से दूर चले जाते हैं, सत्संग में नहीं जाते और भजन-सिमरन नहीं। जब हम संतमत से ज्यादा दूर चले जाते हैं तब उपदेश से कोई लाभ नहीं उठा पाते, न ही सतगुरु की दया को महसूस कर पाते हैं।

संक्षेप में समझें:

  • सतगुरु के देह रूप से ज्यादा नजदीक रहने की कोशिश मत करो, आपके मन में संदेह पैदा हो जा सकते हैं और आपका विश्वास डोल सकता है। यह कहावत याद रखो, “ज्यादा नजदीकी से आदर भाव कम हो जाता है।”
  • बीच का रास्ता अपनाओ। महत्वपूर्ण बनने की कोशिश मत करो, विनम्र शिष्य बन कर रहो। रखो याद रखो, संतमत में कोई भी वी.आई.पी. नहीं है। केवल प्रेमी ही शिष्य कहलाता है। क्योंकि यहां पर केवल प्रेम ही सबसे ऊपर है। विनम्रता ही परमात्मा को मंजूर है। इसलिए हमें इन सब बातों पर अमल करना है।
  • सतगुरु से इतना दूर मत भागो, कहीं ऐसा ना हो कि उनकी मौजूदगी का तुम फायदा ही ना उठा पाओ, इसलिए नजदीकी भी जरूरी है।

“महत्वपूर्ण” शब्द रूहानियत के शब्दकोश में है ही नहीं, क्योंकि यह उपदेश के एकदम उलट है। रूहानी मार्ग पर चलने का अर्थ है अपनी पहचान खत्म करना, अपने अहंकार का त्याग करना और भजन-सुमिरन करते हुए जीते जी मरना। यही एक रूहानियत का महत्वपूर्ण रास्ता है, यही परमात्मा के घर का सिर्फ एक ही रास्ता है।

।।राधास्वामी।।

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