रूहानियत में बताये गये इस काम को करो। आपकी हर इच्छा पूरी होगी।

Radha soami satsang beas- संतमत में रूहानियत इसके बारे में बिल्कुल सबकुछ खोलकर समझाया गया है। कि भाई इस जन्म-मरण के चक्कर से अगर बचना है तो हमें सतगुरु की शरण लेनी होगी। हमें नामदान की युक्ति प्राप्त करनी होगी। भजन-सुमिरन करना होगा, अन्यथा और कोई दूसरा उपाय नहीं है जिसकी द्वारा हम अपने निजघर पहुंच सकें। इसलिए संतो के बताए गए उपदेश पर चलकर हमें परमात्मा की प्राप्ति करनी है।

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आवागमन से छुटकारा चाहिए तो रूहानियत का सहारा

महाराज जी अपने सत्संग में बहुत बार यह बात समझाते थे की अगर इस आवागमन के चक्कर से छुटकारा प्राप्त करना है। तो हमें रुहानियत का सहारा लेना पड़ेगा और इसके जरिए किसी पूर्ण संत से नामदान की युक्त प्राप्त करनी चाहिए। इसके बाद हमारा कर्तव्य बनता है कि हम ज्यादा से ज्यादा भजन-सुमिरन करें। अपनी हलाल की कमाई करें, नेक नीति पर चलें, तो हमारा चौरासी के जेलखाने से छुटकारा होना संभव है। रही बात मनुष्य जन्म की तो इसी जन्म में फायदा उठा लेना चाहिए, क्योंकि अगले जन्म का कुछ नही पता कि मनुष्य जन्म मिलेगा, या ऐसी जगह जन्म होगा कि वहां पर कहीं आसपास में भी ऐसा रूहानियत का संगम नहीं हो। हम कुछ नहीं कर सकते।

महाराज चरण सिंह जी

सभी संतों का एक मक़सद

जितने भी इस दुनिया में संत महात्मा आए हैं। उन सभी का भी यही कहना है की इस चौरासी के जेलखाने से छुटकारा प्राप्त करने के लिए हमें किसी पूर्ण संत की शरण लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि बिना गुरु के हम किसी भी मंजिल को प्राप्त नहीं कर सकते, किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकते। इसीलिए हमें किसी ऐसे गुरु की खोज करनी है। जिसको हर बात का अनुभव हो, की इस चौरासी की जेल खाने से कैसे छुटकारा प्राप्त किया जाए जा सकता है। इसलिए हमें एक अच्छी गुरु की खोज करनी है और उनसे नामदान की युक्ति प्राप्त करनी है।

जीव एक कदम तो गुरु सौ कदम बढ़ाते हैं

संत बताते हैं की जीव अगर परमात्मा की तरफ एक कदम बढ़ाते हैं तो गुरु सो कदम आगे बढ़कर उस शिष्य की, उस जीव की मदद करते हैं। इसलिए हर मनुष्य को चाहिए कि अपने अंदर परमात्मा के प्रति प्यार पैदा करें, तड़प पैदा करें, और परमात्मा को पाने की हर संभव कोशिश करें। शिष्य अगर अपने अंदर परमात्मा के प्रति ज्यादा उत्सुकता बढ़ आएगा उतना ही सतगुरु हमारी मदद करेंगे। किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले हमें अपने अंदर उसके प्रति एक कशिश पैदा करनी, एक तड़फ पैदा करना बहुत जरूरी है।

।।राधास्वामी।।

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