रूहानियत के उसूल और भजन-सुमिरन ये कर देते हैं ये काम।

Radha Soami- जितने भी संत-महात्मा हुए हैं, सभी ने रूहानियत के सभी उसूलों का पालन किया है और अपने गुरु के हुक्म के अनुसार भजन-सुमिरन किया है। जिसकी कारण ही वे इस मायारुपी संसार को छोड़कर परमात्मा की घर में सदा के लिए पहुंच गए हैं। इसीलिए संत-महात्मा हमें भी भजन-सुमिरन करने की हिदायत देते हैं।

बाबाजी गुरिन्दर सिंह जी

बिना भजन-सुमिरन के इस जीवन में आपका कोई नहीं

बाबाजी भी अपने सत्संग में उन सभी संतों का जिक्र करते हुए फ़रमाते हैं कि भाई बिना भजन-सुमिरन के इस जीवन में आपका कोई नहीं हैं। एक भजन-सुमिरन ही है जो आपको इस मायारुपी संसार से अलग कर सकती है और सदा के लिए इस चौरासी के जेलखाने से छुटकारा हो सकता है। इसलिए मालिक के भक्तों और प्यारों समझो और गुरु के बताए अनुसार भजन-सुमिरन में लग जाओ।

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बाबाजी बताते हैं कि मालिक के भक्तों और प्यार की एक घड़ी की संगति या सोहबत मन और बुद्धि की सौ साल की बंदगी से बेहतर है। अगर रास्ता पूर्व की तरफ़ है और हम पश्चिम की तरफ दौड़ रहे हैं तो हम अपनी मंजिल-मकसूद से और दूर होते चले जाते हैं। हर एक महात्मा सत्संग के जरिए हमारे अंदर मालिक से मिलने का शौक और प्यार पैदा करता है। बार-बार हमें हिदायत देते हैं कि भाई भजन-सुमिरन करो। क्योंकि इसके अलावा आपका कोई चौरासी से छुटकारा पाने का उपाय नहीं है।

जीते जी ये हो जाते है हमसे अलग

संत फरमाते हैं दुनिया के सब रिश्ते-नाते नाशवान है। हमारे बहुत से रिश्तेदार, दोस्त, मित्र हमसे जीते जी अलग हो जाते हैं। आखिर में कोई किसी के साथ नहीं जाता। न ही कोई किसी की मदद कर सकता है, लेकिन संत ही असली दोस्त हैं। जो मौत के बाद भी हमारा साथ नहीं छोड़ते। बल्कि हमें यमदूत के पंजों से भी छुड़ाते हैं। ऐसे ही सतगुरु की शरण में आने के बाद हमारा धर्मराज का हिसाब-किताब खत्म हो जाता है। इसके पीछे संतो की ही सोहबत, प्यार, प्रेम और दयामेहर कहीं बनी हुई है। इसलिए गुरु के बताए गए हुकुम अनुसार चलो। भजन-सुमिरन करो।

।।राधास्वामी।।

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