सतगुरु के साथ लेने से ही सिद्ध होगा ये काम, जानने के लिए पढ़ें

Radha Soami – संत बार-बार हमें चेतावनी देते रहते हैं कि भाई, अब समय है, इस मनुष्य जन्म का फायदा उठा ले। किसी पूर्ण संत सतगुरु की शरण में चले जाओ और अपने कर्मों का बोझ कम करो। एक अंतिम अवसर आपके हाथ में है, इसका फायदा उठा लो। बड़ी मुश्किल से, बड़े सौभाग्य से, किसी गुरु की कृपा से हमें यह मनुष्य जन्म मिला है।

बाबाजी

स्वामी जी महाराज का कथन है:

यह तन दुर्लभ तुमने पाया। कोटि जन्म में भटका जब खाया।।

अब या को बिरथा मत खोवो। चेतो छिन-छिन भक्ति कमावो।।

सन्त बार-बार पुकार कर कहते हैं इंद्रियों की भोगों को त्यागो। इसी पूर्ण सतगुरु से युक्त सीखो और अंतर ने प्रवेश करो, क्योंकि वह परमात्मा तुम्हारे अंदर है। अपनी सुरत को शरीर के नौ द्वारों से निकालकर नाम से, दिव्य धुन से जोड़ो। यह नाम सत्पुरुष की आवाज है। जो सीधे उसी से आ रही है और आंखों के पीछे निरंतर धुनकारें दे रही है। अपना ध्यान अंदर प्रकाश में एकाग्र करो और आगे उसे रूहानी मंडलों में जाओ।

बताते हैं कि हमें इस महल से बाहर निकालकर वज्र के मजबूत कपाट बंद कर दिए गए हैं। यह वज्र कपाट केवल पूरे सतगुरु की सहायता से खुल सकते हैं। जब तक अंतर के अंधेरे मार्ग का पूरा भेदी, मार्ग की सब कठिनाइयों, उतार-चढ़ावों का जानकार मार्गदर्शक न मिले, तब तक अंतर में आध्यात्मिक यात्रा आरंभ ही नहीं की जा सकती। मार्ग में हर कदम पर अड़चनें तथा कठिनाइयां हैं जिनके कारण पूरे गुरु की साहित्य के बिना अभ्यासी के लिए अकेले आगे बढ़ना अति कठिन और खतरनाक है।

मौलाना रूम जी का कथन:

बाबाजी गुरिन्दर सिंह जी

मौलाना जी कहते हैं तू रूहानी सफर का कोई भेदी साथ ले, क्योंकि तेरी यात्रा बड़ी खतरनाक है। जो पुरुष बिना पूर्णगुरु को साथ लिए इस मार्ग पर बढ़ने की कोशिश करता है, शैतानी ताकते उसको कुमार्ग पर डाल देती हैं। यदि तेरे सिर पर सतगुरु का रक्षा भरा हाथ नहीं है तो तू सदा भरम और संदेह का शिकार बनता रहेगा, जो तुझे दुविधा में ही रखेंगे। तुझसे पूर्व अनेकों बुद्धिमान व्यक्तियों ने अकेले ही इस मार्ग पर चलने की कोशिश की और वे सब शैतान के जाल में फंस गए और वह इसी चौरासी के जेल में भटकते रह गए।

यदि सौभाग्य से पूरा गुरु मिल जाए तो उसे पूरे दिल से प्रेम करो। संसार, इसके पदार्थों तथा इंद्रियों के भोगों के मोह को छोड़ दो और मनमार्ग को त्याग दो। सतगुरु को साथ लेकर अपने अंदर प्रवेश करो। सतगुरु तुम्हारी सुरत को शब्द के साथ जोड़ देगा। शब्द से जुड़कर उससे अभेद हो जाओ। धीरे-धीरे सुरत शरीर से सिमटने लगेगी। पहले हाथ-पैर सुन होंगे। धीरे-धीरे शरीर सुन होता चला जाएगा। इस तरह धीरे-धीरे ध्यान तीसरे तिल पर टिका कर रखें। इन तरह ध्यान तीसरे तिल पर एकाग्र हो जाएगा। अंतर में प्रवेश करो और संसार को जाओ और अंत में ही सब कुछ मिलेगा। तो आओ किसी पूर्ण सतगुरु से नाम युक्ति प्राप्त करें और बिना नागा भजन-सुमिरन करें।

आओ सिमरन करें:

परमात्मा को अगर प्राप्त करना है तो हमें सतगुरु से प्राप्त नाम की युक्ति पर अमल करना होगा। बिना नागा, चलते-फिरते, उठते-बैठते हमें भजन-सिमरन को जारी रखना चाहिए। हमें अपने मन को तीसरे तिल पर एकाग्र करना है और अपने मनुष्य जन्म का लाभ उठाना है।

।।राधास्वामी।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *