परमात्मा को कैसे पायें? ये है आसान रास्ता: संतमत

Radha Soami Satsang Beas- संत महात्मा अपने अनुभव के अनुसार हमें ज्ञान की शिक्षा देते हैं। हमें रूहानियत के बारे में अवगत कराते हैं। उस परमात्मा को कैसे पाया जाए? इसके बारे में बहुत गहराई से समझाते हैं। संत बताते हैं कि मनुष्य जन्म के द्वारा ही उस परमपिता परमात्मा को पाए जा सकता है। केवल मनुष्य जन्म ही है, वह रास्ता जिसके द्वारा हम अपने निजी घर, निजधाम जा सकते हैं।

परमात्मा से मिलाप करने के लिए मनुष्य-जन्म अमूल्य दात

गुरु नानक साहिब कहते हैं कि हमें आवागमन के बंधन तोड़कर परमात्मा से मिलाप करने के लिए मनुष्य-जन्म की अमूल्य दात दी गई है। परंतु हम दुनिया के धंधों में इस प्रकार फंसे हुए हैं कि जीवन के इस मूल उद्देश्य की ओर हमारा कभी ध्यान ही नहीं जाता। इसके विपरीत जो लोग पूरे गुरु की हिदायत पर चलते हैं। वो उस परमपिता परमात्मा को पा लेते हैं। शब्द, नाम या कलमे में लिव लगाकर वे सदा के लिए भवसागर से पार हो जाते हैं। और आनंद की अनुभूति प्राप्त करते हैं।

कर्म या अच्छे होते हैं, या बुरे और या न अच्छे, न बुरे..!!
हमारा हर एक कर्म अपना प्रभाव या फल पैदा करता है, और यह साधारण नियम या कानून है, कि हमें अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है..!!
हमारा कोई भी कार्य, हमें कर्मों के चक्र से नहीं निकाल सकता..!!
केवल “शब्द या नाम” ही हमें वास्तव में ‘निष्कर्म’ या कर्म-रहित करके “कुलमालिक” के साथ मिला देता है..!!
‘गुरमुखों’ अथवा ‘गुरु-भक्त’ शिष्यों को ही ऐसी उच्च-अवस्था प्राप्त होती है..!!!!

उपाय एक ही है वो है उसके हुुुक़्म की पालना


उसके हुक्म और उसकी मर्जी के अनुसार सब उस पर छोड़ दो। जैसा वह जिंदा रखें, वैसे रहो। जैसे वह कार्य कराना चाहे, वैसे करते जाओ । जहां वह ले जाए, जाओ। उसका हुक्म तुम्हारी एक मात्र साधना हो जाए। तुम अपनी मर्जी हटाओ। उसकी मर्जी को आने दो। तुम स्वीकार कर लो, जीवन जैसा हो। परमात्मा ने दिया है, वही जाने। तुम इंकार मत करो।

दुख आए तो दुख को भी स्वीकार कर लो कि उसकी मर्जी। और अहोभाव रखो, धन्यभाव रखो कि अगर उसने दुख दिया है तो जरूर कोई राज होगा, कोई अर्थ होगा, कोई रहस्य होगा। तुम शिकायत मत करो। तुम धन्यवाद से ही भरे रहो। वह तुम्हें जैसा रखे। गरीब, तो गरीब अमीर, तो अमीर सुख में, तो सुख में। दुख में, तो दुख में।एक बात तुम्हारे भीतर सतत बनी रहे कि मैं राजी हूं। तेरा हुक्म मेरा जीवन है।

सुख में भी सुमिरन करोगे तो ये होगा फायदा

बाबा जी फरमाते हैं कि मनुष्य सुख में प्रभु को भूल जाता है। सुख में केवल वह सांसारिक चीजों का ही सुमिरन करता है। ध्यान करता है। वह सांसारिक सुख सुविधाए उठाने में विलीन हो जाता है। लोभ-लालच में इतना फस जाता है कि वह परमात्मा को भूल जाता है। परंतु अगर सुख में भी हम परमात्मा का सिमरन करेंगे। उसका शुक्राना करेंगे, तो जीवन में कभी भी दुख नहीं आएंगे। सारा जीवन सुखमय व्यतीत होगा। तो आइए भजन सिमरन करें।

राधास्वामी

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