परमात्मा की मर्ज़ी से होता है ये काम। क्या आप जानते हो ये काम?

Radha Soami- बाबाजी के अनुसार जो व्यक्ति सत्संग और कितनी संत से जुड़ा हुआ है। वह व्यक्ति वह जीव बहुत भाग्यशाली होता है, क्योंकि परमात्मा से मिलना हर किसी के भाग्य में नहीं होता। और इसीलिए हमें जो मनुष्य जन्म प्राप्त हुआ है, उसका लाभ उठाना बहुत जरूरी है। हमें संतों की शरण में जाना चाहिए और परमात्मा प्राप्ति की युक्ति प्राप्त करनी चाहिए।

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ये अदभुत खजाना अपने अंदर

परमात्मा ने हर किसी जीव के अंदर वह नाम की युक्ति रखी हुई है। वह अद्भुत खजाना हमारे अंदर रखा हुआ है, परंतु उसको प्राप्त करने का जरिया या रास्ता केवल संतो के द्वारा ही मिल सकता है। हमें संतो की शरण बहुत जरूरी है। सभी संतो का मत है कि परमात्मा हमारे अंदर हैं। परमात्मा को पाने की युक्ति भी अंदर ही है। इसलिए उसको बाहर ना खोज करके, अपने अंदर ही तलाश करना चाहिए।

संत बताते हैं कि परमात्मा ने हमें मनुष्य जन्म दिया है। उसका खास मकसद है कि हम आत्मा को परमात्मा से मिला सकें। परंतु मनुष्य बाहरी मंडलों में खो गया है। वह मायावी दुनिया में गुम हो गया है। वह मन के बहकावे में आकर के इस नेक कार्य को भूल गया है। इसलिए संत बार-बार हमें हिदायतें देते हैं कि भाई इस गफलत की नींद से जागो और अपने अंदर परमात्मा की खोज करो।

दुनिया से हटकर ऐसे करे परमात्मा का शुकराना

हमें सबसे पहले परमात्मा का शुकराना करना है कि हे, परमात्मा आपने हमें अपनी शरण में लिया और मनुष्य जन्म दिया है। उसके लिए आपका आभार। परंतु हम उनका शुकराना ना करके मायावी दुनिया में इतने लीन हो जाते हैं कि शुकराना तो दूर, उनको याद करना ही गवारा नहीं समझते। इसलिए संत फरमाते हैं कि भाई मनुष्य जन्म का फायदा उठा लो। परमात्मा का शुकराना करो, उनकी भक्ति करो। ऐसा समय फिर नहीं आएगा।

।।राधास्वामी।।

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