परमात्मा की दया से मनुष्य को चौरासी के जेलखाने से निकालने आते हैं: बाबाजी

Radha soami- दुनिया में जहां भी कोई संत आता है, वे परमात्मा की दया से केवल मनुष्य को इस चौरासी के जेलखाने से निकलने के लिये आते हैं। परमात्मा से मिलने के लिए आते हैं। इसलिये सन्तों के हुक्म में चलो। परमात्मा को प्राप्त करो।

बाबाजी

परमात्मा हमारे लिए ही मनुष्य का चोला धारण करता है और गुरु के रूप में हमें प्राप्त होते हैं, क्योंकि केवल मनुष्य ही मनुष्य का शिक्षक बन सकता है। देवी-देवता ने कभी देखे नहीं। गाय-भैंसों में न तो बुद्धि है और न ही हम उनकी बोली समझ सकते हैं।

Guru di bakshish

इसलिए मनुष्य चोला धार कर आये परमात्मा

कबीर साहिब, हजरत ईशा, हजरत मोहम्मद, गुरु नानक देव जी, स्वामी जी महाराज तथा अन्य सब संत-महात्मा, ऋषि-मुनि, पीर-पैगंबर मनुष्य चोला धारण करके ही संसार में आये। जब भी प्रभु जीवों को अपना ज्ञान देना चाहते हैं, वह मनुष्य शरीर धारण करके संसार में आता है।

यदि वह किसी और रूप में आए तो हम उसकी भाषा ही न समझ सकते। इसके अतिरिक्त हर योनि के जीव अपनी योनि के दूसरे जीवों से प्रेम करते हैं और उनकी ओर आकर्षित होते हैं। यदि वह मालिक अपने आप आकर हमें अपना ज्ञान न देता तो हमें कभी भी उसका पता नहीं मिलता।

दया और प्रेम के कारण गुरु बनकर आते हैं

वह अपनी दया तथा प्रेम के कारण गुरु बनकर आता है और उस सब देशों, धर्मों तथा जातियों से एक जैसा ही प्रेम करता है। यह नहीं कि किसी विशेष देश, धर्म या जाति के साथ उसका अधिक प्रेम है। सभी देश, धर्म व जातियां उसके अपने होते हैं। उनके मन में किसी के प्रति कोई भेदभाव नहीं होता। उनकी नजरों में सभी जीव एक समान है।

Baba gurvinder singh ji

संत, जिन्हें हम गुरु कहते हैं, परमात्मा के दूत या हरि के जन होते हैं। उनकी शिक्षा सारे संसार के लिए समान होती है। सच्चा गुरु कभी रंग, जाति, देश आदि के झगड़ों में नहीं पड़ता। जगत के रीति-रिवाजों, कर्मकांड या धर्मों से संतों का कोई संबंध नहीं होता। वे सभी धर्मों के होते हैं और सभी धर्म उनके होते हैं।

संसार दुःखों का घर

यह संसार दुख और पीड़ा से भरा है और यह हमारा ‘निजघर’ नहीं है। हम उस अविनाशी सुख-शांति तथा आनंद के लोक के वासी हैं जहां दुख, पीड़ा, रोग अथवा मृत्यु का नाम भी नहीं है।

इसलिए हमें सच्चे गुरु की खोज करनी है और हमें उनसे ज्ञान प्राप्त करके अपने निजघर के रास्ते पर चलना है। गुरु से हमें नाम की युक्ति प्राप्त करके उस पर अमल करना है। गुरु के बताए गए रास्ते पर चलना है और इस दुख, पीड़ा और विनाशकारी दुनिया को त्याग कर हम अपने निजघर, परमधाम, परमात्मा के पास पहुंच जाएंगे। इसलिए आइए, भजन-सिमरन करें, परमात्मा को प्राप्त करें।

।।राधास्वामी।।

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