पल-पल सतगुरु की याद, हर कष्ट दूर करता है: गुरु

Radha soami –सतगुरु फ़रमाते है कि हमारा केवल एक पल जो हमारे सतगुरु, हमारे परमात्मा की सच्ची याद में गुजरता केवल वही हमारा मित्र है। इसके विपरीत जो लाखों साँसे दुनियावी कामों में लगी वे हमारी शत्रु है। सतगुरु फ़रमाते है की परमात्मा की याद मे लगा हुआ, वह हर पल इतना शक्‍तिशाली होता है की वह दुख के पलों पर पर हावी होकर उनके प्रभाव को ही नष्‍ट कर देता है।

गुरु मोहे अपना रूप दिखाओ

ये कमजोरी ना होती तो इस रचना में ना होते

सतगुरु फरमाते हैं, दोष और कमजोरियाँ हम सब में है। अगर हम पूर्ण होते तो इस रचना में न होते। अपने दोषों की जानकारी भी एक सच्चा ज्ञान है। उचित तो यह है कि दुःखों का दुखड़ा रोने के बजाए उन्हें दूर करने की कोशिश की जाए। परमात्मा को पाने की कोशिस की जाये।अपने सतगुरु के हुक्म की पालना करें औऱ उनसे प्राप्त नामदान का सही नियमित समय अनुसार सिमरन करें।

सतगुरु ने सुनायी एक ज्ञानवर्धक कथा

बडी पुरानी घटना है। लाहौर में एक भक्त रहते थे, नाम था छज्जू। वे बडे गुरु प्रेमी थे। एक दिन अपने चौबारे मे सत्संगीयों के साथ बैठे थे। ज्ञान-ध्यान की बाते चल रही थी कि नीचे संतरे बेचनेवाला आया और ऊंची आवाज़ से कहने लगा – अच्छे संगतरे! अच्छे संगतरे!


छज्जू भक्त ने सत्संगीयों से पूछा :- भक्तो! यह नीचे से क्या आवाज आ रही है?”
सत्संगी :- सतगुरु महाराज वह संगतरे का का गुण बता रहा है। लेकिन महाराज वो बोल रहा है कि “अच्छे संगतरे”।
छज्जू भक्त :-” ठीक है, परंतु कहता क्या है? ध्यान से सुनो तो सही।”


इतने मे फिर आवाज आई-” अच्छे संगतरे”!
सत्संगी :-” महाराज! अच्छे संगतरे ही कह रहा है”।
छज्जू भक्त :- हां यही कहता है! समझो।
अच्छे संग तरे, जो अच्छो की संगति करता है, वह तर जाता है। अच्छे संग तरे।

तो आइए, परमात्मा की भक्ति करें

इसीलिए सतगुरु बार-बार हमें हिदायत देते हैं कि अच्छे कर्म करो, अच्छे की शांति करो, अच्छे व्यक्ति की सोहबत करो। क्योंकि अच्छे की संगति ही हमें इस भवसागर से पार कर सकती है। तो आइए, परमात्मा की भक्ति करें, भजन-सुमिरन करें और अपने असल मकसद को पुरा करें। अपने सच्चे घर में वास करें, इस आवागमन से छुटकारा प्राप्त करें।

।।राधास्वामी।।

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