पाँच तत्व की महत्वपूर्ण जानकारी सतगुरु से लें।

Radha Soami- सतगुरु फरमाते हैं आज तक इस संसार में जितने भी संत-सतगुरु आए हैं। उन सबका एक ही मकसद है, एक ही उद्देश्य है। इस मनुष्य जन्म का फायदा उठाना, क्योंकि मनुष्य जन्म में ही हम उस परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। इस चौरासी के आवागमन के चक्कर से छुटकारा पा सकते हैं। मनुष्य शरीर में पांच तत्व मौजूद होते हैं। मनुष्य शरीर को ही सबसे उत्तम योनि माना गया है। हमें इसका भरपूर फायदा उठाना चाहिए।

कोई जग विच दर्दी न मेरा

सतगुरु के मतानुसार

सतगुरू के मत अनुसार हमें किसी पूर्ण संत की शरण प्राप्त कर चाहिए, क्योंकि रूहानियत का रास्ता वहीं से मिलता है। वहीं से हमें ज्ञान प्राप्त होता है कि परमात्मा को कैसे पाया जा सकते हैं। और किस योनि में जाकर हम उसे प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए हमें पूर्ण सतगुरु की खोज करनी है, उनके हुकम में चलते हुए उनके वचनों का पालन करना है। हम उनके बताए गए रास्ते पर चलकर करें, जैसे हमें बताया जाता है की ‘हलाल की कमाई’ करनी है और नेक नीति बनाए रखनी है। इन सब बातों पर अमल करना है ताकि हम अपने काम में सफलता प्राप्त कर सकें।

बाबाजी

अब बात आती है कि इस योनि को ही सबसे उत्तम योनि क्यों माना गया है? सतगुरु बताते हैं कि मनुष्य योनि में विवेक की शक्ति होती है। इस योनि में सोचा भी जा सकता है और उस कार्य को किया भी जा सकता है। मनुष्य इस शरीर में आकर के अपने कर्म बना भी रहा है और अपने कर्मों का भुगतान बिक रहा है। इसलिए यह योनि सबसे उत्तम मानी गई है। इस योनी में पांच तत्व मौजूद होते हैं, आग, जल, आकाश, धरती और वायु।

और अधिक पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

हर जीव कर रहा है भुगतान

गुरु जी फरमाते हैं कि मनुष्य जन्म को छोड़कर जितने भी जीव हैं सभी में किसी में चार, किसी में तीन, किसी में दो तत्व मौजूद है। और सभी योनी अपने कर्मों का भुगतान कर रहे हैं। एक मनुष्य जन्म ऐसा है जिसमें आकर के भुगतान के साथ-साथ अपने कर्म भी बना रहा है। चौरासी के जेलखाने के चक्कर काटने के बाद सबसे उत्तम योनि का जन्म होता है। कभी कीड़े बने, कभी कीट-पतंगे बने, कभी साँप, घोड़े पता नहीं किस-किस योनि में जन्म लेना पड़ा। जब कहीं जाकर हमें यह शरीर मिला है। इसलिए हमें अपने व्यवहार में अनुशासन रखना चाहिए। सब के प्रति सम्मान भावना रखनी चाहिए। सबसे प्रेम करना चाहिए। ये सब कार्य किसी और जीवन में नहीं कर सकते।

गुरु से प्राप्त करो बन्द दरवाजे की चाबी

इसलिए हमें इन सब विचारों पर अमल करना चाहिए। क्योंकि संतो ने जो भी बात बताई है, उन्होंने वह जांच परख कर ही हमारे सामने पेश की है। उनका अनुभव है की मनुष्य जन्म में ही हम परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए हमें क्या करना है? हमें किसी पूर्ण संत सतगुरु की शरण लेनी है। उनकी खोज करनी है और उनसे रूहानियत का रास्ता प्राप्त करना है। रुहानी रूहानी के बारे में जानकारी प्राप्त करनी है और उनसे नामदान की युक्ति प्राप्त करनी है, यानि हमें इस बंद दरवाजे की चाबी प्राप्त करनी है। जिसके द्वारा हम अपने निजी घर में प्रवेश कर सकते हैं और उसके लिए हमें अपने ध्यान को एकाग्र करना होगा और परमात्मा को प्राप्त करना है।

अंतिम अवसर है

रूहानियत के अनुसार मनुष्य जन्म एक अंतिम अवसर है जिसके द्वारा हम परमपिता परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए किसी सतगुरु से नामदान की युक्ति प्राप्त करनी है और उसको सुमिरन करते हुए अपने ध्यान को एकत्रित करना है, अपने मन को एकाग्र करना है और आपने असल मकसद को प्राप्त करना है। इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा भजन-सुमिरन करना है।

।।राधास्वामी।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *