ऊब गये हो? तो आइए इस सच्चे साधन को अपनाते हैं: बाबाजी

Radha Saomi- संत महात्मा बताते हैं यह सच है कि संसार में कोई सुखी नहीं है। हमें केवल अस्थाई शांति मिल जाती है। उससे हम शीघ्र ही ऊब जाते हैं और सुख के लिए दूसरी वस्तु के पीछे भागने लगते हैं। जोकि हमें और अधिक परेशान कर देती है।

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परिणाम फिर वही होता है। स्थाई आनंद केवल अंदर जाकर नाम के साथ जोड़ने में है, क्योंकि शुद्ध अध्यात्मिक मंडलों अर्थात नाम के मंडलों में कभी कोई परिवर्तन नहीं होता। यह दृश्यमान संसार नाशवान है, परिवर्तनशील है, परंतु आध्यात्मिक जगत स्थाई सुख शांति का देश है। वहां तक पहुंचने का मार्ग आपके अपने भीतर है।

पांच पवित्र नामों के सुमिरन द्वारा एकाग्र

आपको चेतना की धारा जो शरीर के रोम-रोम में समाई हुई है, पांच पवित्र नामों के सुमिरन द्वारा एकाग्र करके तीसरे दिन में लाकर शब्द को पकड़ना है। यदि सच्चे हृदय से इस और लग जायें, तो आपके पास दूसरे कामों के लिए अधिक समय नहीं बचेगा और ज्यादा भोग-विलास की लालसा अपने आप गायब हो जाएगी। और हमे अधिक शांति मिलेगी। आपने कई साधन अपनाकर देखे हैं; अब आप सच्चे हृदय से इस साधन को भी प्रयोग में ला करके देखें कि क्या परिणाम निकलता है।

बाबा गुरविंदर सिंह जी

इस सच्चे मार्ग को अपना करके परमात्मा को

अब फिर संत महात्मा बताते हैं कि भाई आप इस सच्चे मार्ग को अपना करके परमात्मा को प्राप्त कर सकते हो। आप इस आध्यात्मिक, संतमत के मार्ग पर चलकर सुख-शांति जो सदैव बनी रहेगी, प्राप्त कर सकते हो। इसलिए हमें अपनी चेतना को अपने सूरत धुन को तीसरे तिल पर जा करके सुनना है। आपने ध्यान को तीसरे तिल पर एकाग्र करना है। और सच्चे हृदय से इस साधन को अपना करके हम परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए आइए; भजन सुमिरन करें। परमात्मा को प्राप्त करें।

।।राधास्वामी।।

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