नामदान के समय हुजुर जी ने बताई थी ये अहम बात

Radha Soami Satsang Beas- एक बार हजूर महाराज चरनसिंह जी सच्चखंड में नामदान के लिए जीवों पर अपनी रहमत भरी दृष्टि डालते-डालते सवाल भी पूछ रहे थे। एक बीबी जी जब उनके सामने आयी, तो हजूर जी ने कुछ अलग और नया ही सवाल पूछ लिया कि ” यह बताओ आप घर में खाना बनाती हैं तो उसने उत्तर दिया,जी हां, मै सारे परिवार के लिए दोनों टाइम खाना बनाती हूँ। महाराज जी ने आगे पूछा, तो सब्जी में नमक कितना डालती हैं। उसने कहा कि हिसाब से,अन्दाजे से ठीक-ठीक डाल देती हूँ।

नामदान की दात

हजूर जी ने उसे नामदान की बख्शिश वाली लाइन की ओर भेज दिया और उसे भी सबके साथ नामदान मिल गया।सेवादार सब हैरान थे कि हजूर जी ने यह अलग अजीब सा सवाल कभी नही पूछा, तो आज इस बीबी जी से पूछने का राज क्या हो सकता है? शाम को काफी अभ्यासी सेवादार हजूर जी से उनकी कोठी मे मिलने गये, तो इस सवाल पर उनकी मेहर जाननी चाही।

जब हुजूर जी ने बताया कि बीबी का समय थोड़ा है

हजूर जी हल्की मुस्कान से बोले, अरे ! उस बीबी का समय थोड़ा है। भजन-सुमिरन(नामदान) का भी टाइम नही बचा उसके पास।अब जब खाना बनायेगी तो मेरी बात उसे नमक डालते-डालते याद आयेगी, तो मै उसी याद (सुमिरन) मे सँभाल लूंगा। बाद में 6-7महीनों के बाद पता चला कि बीबी चढ़ाई कर गई।

इसलिए संत फ़रमाते हैं कि उसकी दया मेहर हमेसा हम पर बनी रहती है । जो कुछ भी करना है सब उसी ने करना है। हमे केवल उनके हुक्म में रहना है , उनके भाणे में रहना है।
मालिक की महिमा दया मेहर अपरम्पार है। ब्यान करना मुश्किल है।

राधास्वामी

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