मौत का रहस्य, मौत का सच, क्या है?

Radha Soami- संत-महात्मा मृत्यु या मौत को कई तरीके से बताने की कोशिश करते हैं। मौत क्या होती है? इसके बारे में हमें विस्तार से समझाते आए हैं, परंतु हम इस जहान से चले जाने वाली क्रिया को मौत समझ बैठे हैं। जबकि मौत के बारे में किसी सन्त से जानें तो पता चलता है इसका क्या अर्थ होता है। आईये जानें मौत क्या होती है?

निश्चित नही मौत का आना

“हालांकि यह निश्चित नहीं है कि मौत कब और कैसे आएगी परंतु यह निश्चित है कि हमारी मौत जरूर आएगी”। हम अंदाजा लगा सकते हैं, तर्क दे सकते हैं, किताबों में ढूंढने की कोशिश करते हैं यह अपनी कल्पना से कुछ सोच सकते हैं, लेकिन हम मृत्यु के बारे में कुछ नहीं जानते। कुछ लोगों को डरावनी लगती है। कुछ लोग हर वक्त इसके बाद में सोचते रहते हैं। कुछ लोगों को तो इसका डर सताता रहता है। कुछ तो इसे स्वीकार ही नहीं करते। लेकिन मौत हम सबको जकड़ लेती है, यही अंतिम सच्चाई है। यही निश्चित है। यहां आकर सब कुछ रुक जाता है।

बाबाजी

कई लोगों का मानना है कि मौत के बारे में बात करना मौत को बुलावा देना माना जाता है। यानी है यह एक अपशकुन की तरह है, कुछ तो भोलेपन से बिना सोच विचार किए खुशी-खुशी यह सोच लेते हैं कि किसी ने किसी तरह मौत के बाद उनके लिए सब कुछ ठीक हो जायेगा। दोनों तरह का नजरिया सच्चाई से भागना है। मृत्यु न तो निराशाजनक है और ना ही रोमांचक। यह तो जिंदगी की सच्चाई है। दरसअल मृत्यु शब्द ही सही नहीं है। क्योंकि मृत्यु तो होती ही नहीं है। इस जीवन का अंत होने पर हम यह हाड़-मास का चोला उतार कर इस दुनिया से चले जाते हैं।

मौत का समय

मृत्यु अमीर-गरीब नही देखती

मौत हम सबके के लिए बराबर है। उसकी नजर में न कोई गरीब, ना कोई अमीर, यह ना राजा, ना भिखारी सब एक समान है। जब मौत दस्तक देती है। तब इंसान ना कहीं भाग सकता है, ना कहीं छिप सकता है। जब मृत्यु की घड़ी आ जाती है तो वह जवान या बूढ़े में, बीमार या तंदुरुस्त में, अमीर-गरीब में कोई भेदभाव नहीं करती। जब आखिरी वक्त आता है तो न कोई चेतावनी मिलती है, न किसी का लिहाज किया जाता है और ना वह टल सकती है। मौत किसी को नहीं छोड़ती। आख़िर हम में से हर एक के नाम के साथ “स्वर्गीय” जुड़ जाता है। मौत हुई दफना दिया गया, हमेशा के लिए चले गए और हमेशा के लिए भुला दिए गए।

संतों की नजर में मृत्यु पर विजय पाने का केवल एक ही उपाय है- “भजन बंदगी”। भजन-सिमरन करते हुए रूहानी जीवन बिताते हुए, “जीते जी मरना”। हम इतना तो जानते हैं कि इस धरती पर थोड़े समय के लिए यह जिंदगी मिली है। और यह असली जिंदगी नहीं है। इस शरीर से परे भी कुछ ऐसा है जो इस शरीर के कष्ट होने पर भी बना रहता है।

आत्मा छुटकारा चाहती है

इच्छा तो यही है कि मनुष्य शरीर हमेशा के लिए बना रहे, लेकिन आत्मा शरीर के बंधन से छूटने के लिए तड़पती है। क्योंकि असल में आत्मा तभी सचेत हो सकती है जब मृत्यु को प्राप्त करता है। ऐसा अनुभव हमें केवल भजन-सिमरन के दौरान ही हो सकता है। भजन-सिमरन के दौरान “जीते-जी मरने” की अवस्था में होता है और बाद में देह त्यागने के समय होता है। “जीते-जी मरना” एक असल मौत कहलाता है। उससे दौरान मृत्यु का रहस्य पता चल जाता है।

तो आइए-

भजन बंदगी की करें और मौत के बारे में जानें कि आखिर मरना किसे कहते हैं? मृत्यु का रहस्य क्या है? इन सब के बारे में हमें तब पता चलेगा जब हम अपना रूहानी सफर तय करेंगे। भजन-सिमरन करेंगे। मालिक के हुक्म के अनुसार चलेंगे। उनकी रहनी में, उनके हुक्म में चलेंगे। उनके रजा में राजी रहेंगे। भजन-सिमरन करें।

।।राधास्वामी।।

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