मनुष्य जन्म का लाभ लेना है तो बाबाजी की इन बातों पर करें अमल

Radha Soami- संत महात्माओं की वाणी में अमृत छलकता है। क्योंकि वह जानते हैं कि हमारी अमृतवाणी किसी भी कठोर हृदय को पिघला सकती है। मनुष्य चाहे वह कितना ही कठोर क्यों ना हो। प्यार, प्रेम और सेवा एक ऐसी अद्भुत कड़ी है जिसकी द्वारा किसी की भी कठोर स्वभाव को हम नम्रता में बदल सकते हैं।

कोई नहीं बिन तेरे

सबका आदरपूर्वक सम्मान करें

इसीलिए बाबाजी हमेशा प्रेम, प्यार और सेवा भावना पर बहुत जोर देते हैं। बाबाजी समझाते रहते हैं कि हमें हमेशा दूसरे व्यक्ति को बड़े प्यार से, बड़े आदर से और नम्रता पूर्वक बात करनी चाहिए। उनका आदर सत्कार करना चाहिए। क्योंकि यह सब करने से आपके संस्कारों का प्रदर्शन होता है। आपकी कुल और आपके गुरु की सिखाएं हुए गुणों का भी प्रदर्शन होता है। इससे पता चलता है कि आप एक अच्छे और सच्चे गुरु की शरण में जा चुके हो।

बाबा गुरिन्दर सिंह जी

बाबाजी जब भी हमें सत्संग फरमाते हैं तो हमें नामदान, भजन-सिमरन, सेवा भावना, प्यार-प्रेम के बारे में बहुत जोर देकर समझाते हैं, कि सेवा हम कहीं भी, कैसी भी और किसी भी मनुष्य की कर सकते हैं। मगर वह सेवा निस्वार्थ भाव से होनी चाहिए। उसमें कोई स्वार्थ ना हो। वही सेवा असली सेवा कहलाती है। क्योंकि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा से हमारा मन कमजोर पड़ता है। अहंकार नहीं आता है। मन में नम्रता आती है और मन को एकाग्र करने में सहायता मिलती है।

निःस्वार्थ सेवा से आती है मन में नम्रता

उसके बाद जब मन एकाग्र होना सीख जाए तो हमारा मन भजन-सुमिरन में आसानी से लगता है। सिमरन करते-करते हम एक ऐसे मुकाम पर पहुंच जाते हैं कि हमें वहां से प्रकाश नजर आने लगता है। हम अपने लक्ष्य में सफलता प्राप्त कर लेंगे और जल्द ही इस जन्म का लाभ लेलेंगें। अब जरूरी है की युक्ति पर अमल करें, उनके कहे अनुसार चलें। जो गुरु ने हमें अच्छी और रूहानियत की शिक्षा दी है, उस पर अमल करें, तो ही हम इस मनुष्य जन्म का लाभ उठा सकते हैं।

हमें गुरु द्वारा बताए गए इन सभी बातों पर अमल करते हुए ज्यादा से ज्यादा भजन-सिमरन करना है। हमें परमात्मा की भक्ति करनी है, ताकि जिस काम के लिए इस धरती पर हम आए हैं। वह अपना कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो। इसके लिए हमें परमात्मा की भक्ति करनी है। जिससे हम उनकी रहमत पाने की काबिल होंगे और जल्द ही हम इस चौरासी के जेलखाने से पार उतर जायेंगे। तो आएगी भजन-सुमिरन करें। परमपिता परमात्मा को प्राप्त करें।

राधास्वामी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *