मनुष्य इसलिए होता है गलतफहमियों का शिकार: बाबाजी

Radha Soami – मनुष्य गलतफहमियों का शिकार होता रहता है। मनुष्य गलतियों का पुतला है, ना जाने कितनी गलतियां करता है और फिर माफी मांगने लगता हैं। परंतु यह ज्यादा दिनों तक तक नहीं चलता। उसे अपने कर्मों का हिसाब देना होता है। अच्छे कर्म की है तो अच्छे फल भागेगा। बुरे कर्म किए हैं तो उसको दुखों से गुजरना पड़ेगा। क्योंकि कर्मो का हिसाब चुकाना ही पड़ता है।

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मन की ख़ूबी आसान बात को जटिल बनाता है

किसी सीधी-सादी बात को मान लेना हमें अक्सर मुश्किल लगता है। मन सोच-सोचकर परेशान हो जाता है यह इतना आसान कैसे हो सकता है। जरूर इसमें कोई चाल होगी, कोई दाँव-पेंच होगा के जो हमारी पकड़ में नहीं आ सकता।

हमारे मन की यह खूबी है कि यह आसान बातों को भी मुश्किल बना लेता है। यह मन का खेल है। अगर स्थिति जटिल हो तो मन को उस जटिलता में ही मजा आता है। चाहे वह शिकायत भी करता रहे की समस्या आसान होनी चाहिए थी। मन की आदत है कि वह सहज बातों को जटिल कर देता है और मनुष्य को परेशानी में डाल देता है।

हम गलतफहमियों में ही खुश रहते हैं। क्या यह एक तरह से सच्चाई से मुंह मोड़ना नहीं है? क्या यह सच्चाई का सामना करने की बजाय उसे नकार कर उसे दूर भागना नहीं है? या फिर हमारी समझ में कुछ कमी है? हम अपना भविष्य जानने के लिए ज्योतिषियों और हाथ देखने वालों के पास जाते हैं। लेकिन अगले दस सालों की बात तो छोड़ो, अभी हमारे साथ क्या घटना घटने वाली है, क्या कोई बता सकता है? भविष्य बताने वालों को खुद अपने परिवार के बारे में कुछ नहीं पता होता।

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भविष्यवाणी करने वालों से बनता है डर का माहौल

हाथ देखने वाले भले ही यह भविष्य कर दें कि हम अब बहुत अमीर हो जाएंगे और हमारी बड़ी लंबी उम्र होगी, लेकिन अगले दिन आए भूचाल में हमारा पूरा परिवार, धन-दौलत तथा संपत्ति सब कुछ पलों में ही मलबे के नीचे दब सकते हैं।

गलतफहमियां डर के कारण पैदा होती है!

अज्ञात का डर, मौत का डर, मौत का डर, जिंदगी से डर, मंजूरी का डर, नामंजूरी का डर, बीमारी का डर, गरीबी का डर और डर का भी डर, हम हमेशा डर के शिकंजे में रहते हैं। इसलिए मनगढ़ंत क़िस्से बनाकर अपने आप को तसल्ली देते हैं ताकि हमें सच्चाई का सामना ना करना पड़े।

हमने कई बार आसमान में बादलों को धीरे-धीरे गुजरते हुए देखा है। हर कोई इसके आकार को देखकर अपने हिसाब से अटकलें लगाता है और यह आकार हमारे इस स्थिति पर लगातार बदलता रहता है। बादलों की आकार भ्रांतियां हैं और आखिरकार गायब हो जाते हैं। हमारा जीवन और रिश्ते-नाते, धन-दौलत, और गरीबी, सुख और दुख भी इसी तरह मात्र भ्रांतियां है, गलतफहमी है। हमारे देखते ही देखते यह धीरे-धीरे गायब हो जाते हैं। कुछ भी बाकी नहीं रहता।

यह संसार आकाश की तरह

यह संसार आकाश की तरह है और अलग-अलग भूमिका निभाने वाले लोग बादलों की तरह है, जो लोग अलग-अलग आकारों में इधर-उधर घूमते हैं और आखिर में गायब हो जाते हैं। लेकिन सत्य सहज है। सत्य सदा रहने वाला है। सत्य तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता हमारे अंतर में है। जहां हमें अपने अहंकार को त्याग कर खामोशी से प्रेम-प्यार के साथ पूरी तन्मयता और विश्वास रखकर, दिल में उसके लिए तड़प लिए हुए अकेले जाना है। इतना सहज है सत्य।

सत्य की खोज के लिए सतगुरु की शरण जरूरी

हमें सत्य को समझने के लिए पूर्ण संत सतगुरु की शरण में जाना होगा। हमें उनसे नाम की युक्ति प्राप्त करनी होगी और उसे हर रोज बिना नागा हमें जाप करना होगा। ज्यादा से ज्यादा भजन-सुमिरन करना है। हमें अपने मन को एकाग्र करते हुए, अपने प्रभु परमात्मा की भक्ति करनी है और परमात्मा के अंतर में दर्शन करने हैं।

।।राधास्वामी।।

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