मन को बदलो,भजन करो, परमात्मा तुम्हारे अन्दर है

Radha Soami- सन्त फ़रमाते हैं कि अगर परमात्मा को पाना है तो घर में रहो, परन्तु भजन करो। अपने मन की स्थिति को बदलने की कोशिश करो, परमात्मा तुम्हारे अन्तर में है, कहीं दूर नहीं है। धुन सबके अंतर में निरंतर हो रही है, पर हमारे बाहरमुखी होने के कारण यह सुनाई नहीं देती।

एक प्रेमी की प्रेम कथा



एक व्यक्ति हमेशा अपने सतगुरु के नाम का जाप किया करता था। धीरे-धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था। इसीलिए एक कमरे मे ही पड़ा रहता था। 
जब भी उसे शौच,स्नान आदि के लिये जाना होता था। तो वह अपने बेटो को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे।

धीरे-धीरे कुछ दिन बाद बेटे कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे। इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे।

अब और ज्यादा बुढ़ापा होने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा था। एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है। अब ये रोज का नियम हो गया।

एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नही आते थे। लेकिन ये तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बडे कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है ।

एक रात वह व्यक्ति उसका हाथ पकड लेता है और पूछता है कि सच बता तू कौन है? मेरे बेटे तो ऐसे नही हैं ।
अभी अंधेरे कमरे में एक अलौकिक उजाला हुआ और उस लड़के रूपी सतगुरु ने अपना वास्तविक रूप दिखाया।

वह व्यक्ति(बूढ़ा) रोते हुये कहता है : हे प्रभु, आप स्वयं मेरे निवृत्ती के कार्य कर रहे है। यदि मुझसे इतने प्रसन्न हो तो मुक्ति ही दे दो ना।

सतगुरु कहते है कि जो आप भुगत रहे है वो आपके प्रारब्ध है। आप मेरे सच्चे साधक है। हर समय मेरा नाम भजन करते है। इसलिये मै आपके प्रारब्ध भी आपकी सच्ची साधना के कारण स्वयं कटवा रहा हूँ।

व्यक्ति कहता है कि क्या मेरे प्रारब्ध आपकी कृपा से भी बडे है। क्या आपकी कृपा,मेरे प्रारब्ध नही काट सकती है।

सतगुरु कहते है कि, मेरी कृपा सर्वोपरि है। ये अवश्य आपके प्रारब्ध काट सकती है, लेकिन फिर अगले जन्म मे आपको ये प्रारब्ध भुगतने फिर से आना होगा। यही कर्म नियम है। इसलिए आपके प्रारब्ध मैं स्वयं अपने हाथो से कटवाकर इस जन्म-मरण से आपको मुक्ति देना चाहता हूँ।

सतगुरु सदा हमारे संग, दूर ना समझेे

परमात्मा हर वक्त हमारे साथ है। हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि वह हमें कब, कहां और कैसे-कैसे बचाता है। हमारी किस प्रकार मदद करता है लेकिन हमारे जीवन में कभी जरा भी कष्ट तकलीफ आए तो हम गिला-शिकवा करने से नहीं चूकते। एक बात का पक्का निश्चय कर लें कि जो भी हो रहा है, उसके पीछे कोई न कोई कारण है। जिसमें निश्चित हमारी ही कोई भलाई छिपी है। इसलिए हर तरह की ज़िद छोड़कर जो भी जैसा भी हो रहा है उसे ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार करें, और सतगुरु द्वारा प्राप्त युक्ति पर अमल करें। भजन-सुमिरन करें, एवं सतगुरु के प्रति शुकराना करें।

।।राधास्वामी।।

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