किस की कृपया से मिली सतगुरु की सोहबत और संगति जानें।

Radha Soami- मालिक(परमात्मा) ने हम पर कृपया की तो हमें सतगुरु की सोहबत और संगति प्राप्त हुई। उसके बाद हम पर सतगुरु की बख्शीश हुई और उन्होंने हमारी सुरत या आत्मा को शब्द से जोड़ दिया, जिसका अभ्यास करके दुनिया से हमारा मोह निकल जाता है और हमारे अंदर मालिक का प्यार पैदा हो जाता है। सतगुरु बताते हैं जीव के हाथ में कुछ नहीं है, उनके बस में कुछ नहीं है, जो कुछ भी है उस मालिक की बख्शीश है, उससे गुरु की बख्शीश है।

Guru du bakshish

गुरु अर्जुन साहिब जी:

कहु नानक हम नीच करमां।। सरणि परे की राखहु सरमा।।

सतगुरु के मुताबिक अपने आप को बहुत दीनतापूर्ण समझना चाहिए। उच्च कोटि के महात्मा होकर अपने बारे में कितने नम्र और दीनतापूर्ण शब्दों का उपयोग करते हैं गुरु नानक साहिब अपनी वाणी में कई जगह अपने आपको ‘लाल गोला’ ( सेवक और गुलाम), ‘दासों का दास’, ‘नीच कर्मा’ हैं। हमें इन महात्माओं के जीवन से शिक्षा लेनी चाहिए, जो धुरधाम पहुंचकर, कुल-मालिक बनकर भी दम नहीं मारते। हमारे साथ कोई साधारण-सी भी हुकूमत आ जाए तो हम इंसान को इंसान ही नहीं समझते। हमारा जमीन पर सीधा चलना ही मुश्किल हो जाता है।

महाराज चरण सिंह जी

सतगुरु समझते हैं कि महात्माओं का हमें समझाने का सिर्फ यही मतलब है कि किसी चीज का घमंड और अहंकार नहीं करना चाहिए। इंसान की जामे में बैठकर मन में नम्रता, दीनता और आजिज़ी रखनी चाहिए और नाम की कमाई करनी चाहिये, क्योंकि नाम की कमाई ही हमारा साथ देगी और तभी हमारा देह में आने का मकसद पूरा हो होगा। परमात्मा की प्राप्ति संम्भव है।

Radha soami satsang beas

हज़रत ईसा बाइबल

हजरत ईसा बाइबल में कहते हैं, “क्योंकि मैंने अपनी ओर से कुछ नहीं कहा बल्कि पिता जिसने मुझे भेजा है उसी ने मुझे हुकुम दिया है कि मैं क्या कहूं और क्या समझाऊं।”

एक और स्थान पर आप कहते हैं, “मेरा उपदेश मेरा नहीं बल्कि मेरे भेजने वाले का है।” संतों की शिक्षा का आधार उनका निजी अनुभव होता है। वे ग्रंथ-पोथियाँ पढ़कर सुनी सुनाई बात नहीं करते। वे तो जो कुछ आंखों से देखते हैं और जो उनका अपना अनुभव होता है, उसी को बयां करते हैं। हजरत ईसा कहते हैं, “मैं तुझसे सच कहता हूँ कि हम जो जानते हैं वही कहते हैं और जिसे हमने देखा हैं, उसी की गवाही देते हैं।

हमें संतो के द्वारा जो उपदेश मिले हैं, हमारा कर्तव्य बनता है कि हम उन पर विचार अवश्य करें। सतगुरु बार-बार हमें यही चेतावनी देते हैं कि यह अंतिम अवसर है कि आप इस चौरासी के जेलखाने से बाहर निकल सकते हो। अन्यथा इस तरह बार-बार इस जेलखाने में चक्कर लगाते रहेंगे।

सतगुरु की इन बातों पर अमल जरूरी

इसलिए हमें संतो के हुक्म के अनुसार उनके विचारों पर अमल करना चाहिए। उन्होंने जो अपना अनुभव हमारे सामने पेश किया है, हमें उनके उदाहरणों पर चलना चाहिए। उन्होंने नाम भक्ति के बारे में बताया है उस पर अमल करना चाहिए। हमें किसी संत सतगुरु से नामदान की प्राप्त करना है और उसके बाद रात-दिन एक करते हुए, हमें भजन-सुमिरन करना है और इस देह का पूरा लाभ उठाना है और इस चौरासी के जेलखाने से छुटकारा पा करके, हम परमात्मा में समा जाना है।

।।राधास्वामी।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *