जब किसान ने कहा-आपने सब दिया, अब सेवा का मौका दो।

Radha Soami – बाबाजी किसान की कहानी के द्वारा समझते हैं कि जो भी कुछ हमें मिला है, हमें उसी में संतुष्ट रहना चाहिए। ईश्वर हमें वही सब हमें देते हैं जो हमारे लायक होती हैं। और जो हम ईश्वर से मांगते रहते हैं उस समय भी हमें हमारे हित में रहने वाली सब चीजें मिलती हैं। परन्तु फिर हम उस परमात्मा को भला-बुरा कहने लग जाते हैं जो कि उचित नहीं है।

बाबाजी

जीवन का महत्व

पुराने समय की बात है। एक गाँव में दो किसान रहते थे। दोनों ही बहुत गरीब थे। दोनों के पास थोड़ी-थोड़ी ज़मीन थी। दोनों उसमें ही मेहनत करके अपना और अपने परिवार का गुजारा चलाते थे। अकस्मात, कुछ समय पश्चात दोनों की एक ही दिन, एक ही समय पे मृत्यु हो गयी। यमराज दोनों को एक साथ भगवान के सामने लाया गया। भगवान ने उन्हें देख के उनसे पूछा, ” अब तुम्हे क्या चाहिये। तुम्हारे इस जीवन में क्या कमी थी, अब तुम्हें क्या बना के मैं पुनः संसार में भेजूं।”

जब भगवान ने कहा “तथास्तु

हे भगवान! आपने इस जन्म में मुझे बहुत घटिया ज़िन्दगी दी थी। आपने कुछ भी नहीं दिया था मुझे। पूरी ज़िन्दगी मैंने बैल की तरह खेतों में काम किया है। जो कुछ भी कमाया वह बस पेट भरने में लगा दिया, ना ही मैं कभी अच्छे कपड़े पहन पाया और ना ही कभी अपने परिवार को अच्छा खाना खिला पाया। जो भी पैसे कमाता था, कोई आकर के मुझसे लेकर चला जाता था और मेरे हाथ में कुछ भी नहीं आया।

उसकी बात सुनकर भगवान कुछ समय मौन रहे और पुनः उस किसान से पूछा, ” तो अब क्या चाहते हो तुम, इस जन्म में मैं तुम्हे क्या बनाऊँ।” भगवान का प्रश्न सुनकर वह किसान पुनः बोला, ” भगवन आप कुछ ऐसा कर दीजिये, कि मुझे कभी किसी को कुछ भी देना ना पड़े। मुझे तो केवल चारों तरफ से पैसा ही पैसा मिले।”

अमीर और भिखारी

भगवान ने उसकी बात सुनी और कहा, ” तथास्तु, तुम अब जा सकते हो मैं तुम्हे ऐसा ही जीवन दूँगा जैसा तुमने मुझसे माँगा है।” उसके जाने पर भगवान ने दूसरे किसान से पूछा, ” तुम बताओ तुम्हे क्या बनना है, तुम्हारे जीवन में क्या कमी थी, तुम क्या चाहते हो?”

मैं आपसे क्या मांगू, अपने सब दिया

उस किसान ने भगवान के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा, ” हे भगवन। आपने मुझे सबकुछ दिया, मैं आपसे क्या मांगू। आपने मुझे एक अच्छा परिवार दिया, मुझे कुछ जमीन दी जिसपे मेहनत से काम करके, मैंने अपना परिवार को एक अच्छा जीवन दिया। खाने के लिए आपने मुझे और मेरे परिवार को भरपेट खाना दिया। मैं और मेरा परिवार कभी भूखे पेट नहीं सोया। बस एक ही कमी थी मेरे जीवन में, जिसका मुझे अपनी पूरी ज़िन्दगी अफ़सोस रहा और आज भी हैं। मेरे दरवाजे पे कभी कुछ भूखे और प्यासे लोग आते थे। भोजन माँगने के लिए, परन्तु कभी-कभी मैं भोजन न होने के कारण उन्हें खाना नहीं दे पाता था, और वो मेरे द्वार से भूखे ही लौट जाते थे। ऐसा कहकर वह चुप हो गया।”

कोई भूखा ना जाये

भगवान ने उसकी बात सुनकर उससे पूछा, ” तो अब क्या चाहते हो तुम, इस जन्म में मैं तुम्हें क्या बनाऊँ।” किसान ने भगवान से हाथ जोड़ते हुए विनती की, ” हे प्रभु! आप कुछ ऐसा कर दो कि मेरे द्वार से कभी कोई भूखा-प्यासा ना जाये।” भगवान ने कहा, “तथास्तु, तुम जाओ, तुम्हारे द्वार से कभी कोई भूखा प्यासा नहीं जायेगा।” फिर जन्म लेने के बाद वह व्यक्ति उस गाँव का सबसे बड़ा भिखारी बना। अब उसे किसी को कुछ देना नहीं पड़ता था, और जो कोई भी आता उसकी झोली में पैसे डालके ही जाता था।

दूसरा व्यक्ति जिसने भगवान से कहा था कि उसे कुछ नहीं चाहिए, केवल इतना हो जाये की उसके द्वार से कभी कोई भूखा-प्यासा ना जाये। वह उस गाँव का सबसे अमीर आदमी बना। उसके यहां से कोई खाली हाथ नहीं जाता था। इसीलिए ध्यान दे ईश्वर ने जो दिया है। उसी में संतुष्ट होना बहुत जरुरी है। अक्सर देखा जाता है कि सभी लोगों को हमेशा दूसरे की चीज़ें ज्यादा पसंद आती हैं और इसके चक्कर में वो अपना जीवन भी अच्छे से नहीं जी पाते।

हर बात के दो पहलू होते हैं –

सकारात्मक और नकारात्मक, अब ये हमारी सोच पर निर्भर करता है कि हम चीज़ों को नकारत्मक रूप से देखते हैं या सकारात्मक रूप से। अच्छा जीवन जीना है तो अपनी सोच को अच्छा बनायें। चीज़ों में कमियाँ मत निकालें, बल्कि जो भगवान ने दिया है उसका आनंद लें और हमेशा दूसरों के प्रति सेवा भाव रखें।

इधर उधर ना भटको, भजन करो।

बाबा जी बार-बार हमें समझाते रहते हैं कि हमें इधर-उधर भटकने की बजाय केवल भजन-सुमिरन पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि जो हमें चाहिए था वह परमात्मा ने हमें कई दिया और व्यर्थ के ताना-बाना बुनने के चक्कर में पड़े तो हमारा जीवन व्यर्थ हो जाएगा। इसलिए कि बाहर भटकना बन्द करें और अपने परमात्मा को प्राप्त करें।

।। राधास्वामी ।।

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