इस रास्ते से परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं : बाबाजी

Radha Soami- सभी संत महात्मा हमें परमात्मा को प्राप्त करने का एक आसान और सरल रास्ता बताते आये हैं। परंतु मनुष्य उस सरल रास्ते पर ना चलकरके, विपरीत तरीके से उस परमात्मा को प्राप्त करना चाहता है, जोकि संभव नहीं है। परमात्मा को केवल रुहानियत के जरिए ही प्राप्त किया जा सकता है। उसके लिए हमें किसी संत-सतगुरु की आवश्यकता पड़ती, हमें एक अच्छे गुरु की आवश्यकता पड़ती है।

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किस रास्ते परमात्मा की खोज

बाबाजी फरमाते हैं की किसी भी कार्य को करने के लिए हमें उस कार्य के जानकार की आवश्यकता पड़ती। जो उस कार्य को जानता होगा, वही हमें उसके बारे में समझा सकता है, सिखा सकता है। हमें उस रास्ते पर जा चुके किसी व्यक्ति की आवश्यकता पड़ती है जो हमें उस रास्ते के बारे में समझा सके, उस रास्ते के बारे में बता सके कि उस रास्ते में क्या कठिनाइयां आ सकती हैं और इस रास्ते पर चल कर क्या फायदा हो सकता है।

इसीलिए हमें किसी भी कार्य में सफल होने के लिए गुरु की आवश्यकता पड़ती है। जो हमें सिखाये कि हम किस रास्ते पर और कैसे यह कार्य करना है।

बाबाजी गुरविंदर सिंह जी

इसलिए हमें एक अच्छे गुरु की खोज करनी है, जिसको रूहानियत के बारे में पूर्णतया ज्ञान प्राप्त हो और जो हमें इस मायावी जेलखाने से छुटकारा दिला सके। हमें इस अंधकार में से निकाल कर, मालिक के दरबार तक पहुंचा सके। ऐसी गुरु की आवश्यकता है, ऐसी गुरु की खोज करनी है। क्योंकि परमात्मा के घर में केवल वही गुरु हमें पहुंचा सकता है जो पूर्ण सतगुरु हो, जो रूहानियत का ज्ञाता हो। जिसने जीते जी उस परमात्मा की प्राप्ति की हो वह हमें इसे मनुष्य के जन्म का फायदा दिला सकता है।

हमें पूर्णगुरु से परमात्मा प्राप्ति की शक्ति

हम उस पूर्णगुरु की खोज करके उनसे रूहानियत के रास्ते की जानकारी प्राप्त करनी है और हमारे तीसरे तिल पर अपने ध्यान को एकाग्र करने का तरीका प्राप्त करना है। हमें अपने ध्यान को तीसरे तिल पर एकाग्र करने की शक्ति प्राप्त करनी है यानी कि हमें उनसे नामदान की युक्ति प्राप्त करनी है। जिसके द्वारा हम इन सभी दसों द्वारों से निकल करके उस परमात्मा के दरबार तक पहुंच सके। इसके लिए हम अपने आपको गुरु के अनुसार चलने पर मजबूर कर देना है। हमें अपने गुरु के हुक्म के अनुसार चलना है।

आओ! अमल करें

तो आओ, हम सब पूर्णगुरु के हुकुम के अनुसार चलें, उनसे नामदान की युक्ति प्राप्त करके भजन-सुमिरन करें। इस मनुष्य जन्म में आने का फायदा उठाएं। सदा-सदा के लिए चौरासी के चक्कर से छुटकारा प्राप्त करें और अपने नीजघर यानी कि परमात्मा के घर जा पहुंचे और अपने असल मकसद को प्राप्त करें।

।।राधास्वामी।।

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