इस काम को करो, मनुष्य जन्म होगा सार्थक: बाबाजी

Radha Soami- संत हमें वही चीजें समझाते हैं, जो उन्होंने अनुभव किया है। जो उन्होंने रुहानियत से पाया है। वह सब बातें हमारे सामने रखते हैं ताकि हम मनुष्य जीव उस नेक रास्ते पर चलकर, रूहानियत के रास्ते पर चलकर परमात्मा को प्राप्त कर सकें। संत बताते हैं कि यही मनुष्य जन्म आखिरी रास्ता है, जिसके द्वारा हम अपने असल काम को पूरा कर सकते हैं और इस चौरासी के जेलखाने से छुटकारा पा सकते हैं।

ये मनुष्य जन्म सौभाग्यशाली जीव को ही

यह मनुष्य जन्म हमें बडी मुश्किलों से मिला है। संत महात्मा बताते हैं कि मनुष्य जन्म बड़े सौभाग्यशाली जीव को मिलता है। उसके किसी अच्छे पुण्य कर्मों के आधार पर यह जन्म मिला है और किसी संत की मेहर और उसकी रहमत से ही यह जन्म मिला है। अब वह वक्त आ गया है कि हम संत महात्माओं के हुक्म अनुसार चलें। भजन-सुमिरन करके अपने इस जन्म का लाभ उठायें।

बाबा गुरिंदर सिंह जी।
बाबा गुरिन्दर सिंह जी

संतो के मुताबिक मनुष्य जन्म सबसे उत्तम जन्म माना गया। क्योंकि मनुष्य जन्म में पांच तत्व मौजूद होते हैं। बाकी जितने भी जीव है उन सब में किसी में चार तत्व, किसी में तीन तत्व, किसी में दो तत्व और अंत में एक तत्व मौजूद होता है। इसलिए इस जन्म को प्राथमिकता दी गई है और इसी जन्म में ही वह विवेक की शक्ति है। जिसके द्वारा हम सोच सकते हैं समझ सकते हैं और अपने कार्य को कर सकते हैं।

अंधविश्वासी क्यों

कई जगह संतो ने बताया है कि मनुष्य अंधविश्वासी बहुत है। डर के मारे अपने निचले तत्व वाले जीव की पूजा करने पर उतर आता है। कोई पीपल को पूजता है, कोई किसी अन्य चीज को पूजता है। मंदिरों में जाते हैं, गुरूद्वारों, दरगाह, मस्ज़िदों में जाते हैं। परन्तु संतों की नजर में यह जन्म सबसे उत्तम है।

अंधविश्वास

मनुष्य को कोई आवश्यकता नहीं कि वह कीसी निचले तत्वों वाले जीवों की पूजा करें। यह सब भय के मारे करने लग जाते है। हमें चाहिए कि संतों के हुक्म में चलें, उनसे प्राप्त नामदान की युक्ति पर अमल करें और सच को जानें। इस जन्म में आने का उद्देश्य को समझें।

बाबाजी के सवाल जवाब

बाबा जी फरमाते हैं

एक जगह बाबा जी फरमाते हैं कि हमें हर एक जीव का आदर चाहिए, हर जीव की सेवा चाहिए, किसी को कोई दुख नहीं देना चाहिए। किसी को कोई दर्द नहीं देना है। हम जितनी सेवा करेंगे, उतना हमारा मन झुकना सीखेगा। सेवा करने से ही मन में नम्रता आती है।

भजन-सुमिरन करने में आसानी होती है। हमें जब भी मौका मिले बिना किसी स्वार्थ के सेवा करनी चाहिए। मन में हमेशा सेवा भावना रखना बहुत जरूरी है। आज जो हमें यह मनुष्य जन्म मिला है यह भी किसी अच्छे पुण्य कर्मों की वजह से, किसी अच्छे सेवा भावनाओं के हिसाब से ही हमें यह जन्म मिला है।

आओ, हुक्म की पालना करें।

तो आइए, सेवा करें। भजन-सुमिरन करें। परमपिता परमात्मा को प्राप्त करें। हमें हर वक्त अपने अंदर भजन-सुमिरन को चालू रखना है। भजन-सुमिरन को उठते-बैठते, चलते-फिरते, खाते-पीते हमें चाहिए कि हम सिमरन को जारी रखें। जितना हम भजन-सिमरन करेंगे उतना रूहानियत का रास्ता साफ होगा। हमें अपने निजीघर जाने में आसानी होगी। जल्दी ही परमपिता परमात्मा की प्राप्ति होगी। तो आओ और अमल करो।

।।राधास्वामी।।

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