इन वचनों पर करो अमल, नहीं रुकेगा कोई काम: बाबाजी

Radha Soami – बाबाजी के इन वचनों पर अमल करो। गुरु के अनुसार रूहानियत में सबसे ज्यादा सेवा भावना मन में नम्रता, प्रेम और दीनता बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर मन में नम्रता होगी तो हर व्यक्ति को हम प्रेम की भावना से देख पाएंगे। क्योंकि बाबाजी के अनुसार, हर सन्त के अनुसार परमात्मा हर एक जीव के अंदर वास करता है। इसलिए नम्रता, प्रेम और दीनता बहुत जरूरी है।

बाबाजी

सफलता के लिए इन बातों का रखो ध्यान।

अगर हमें रूहानियत में सफलता प्राप्त करनी है तो हमें संतो के वचनों पर अमल करना बहुत जरूरी है, क्योंकि संत वही हमारे सामने रखते हैं जो उन्होंने अनुभव किया है और अनुभव करके ही उन्होंने परमात्मा को प्राप्त किया है। इसलिए हमें संत के द्वारा बताए गए वचनों पर अमल करना बहुत जरूरी है।

संतो के वचन जो होते हैं उनमें कोई बहुत बड़ी बात नहीं होती। संत केवल नेक-नीति की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। संत समझाते हैं कि हमें हक-हलाल की कमाई करनी बहुत जरूरीहै। हक-हलाल की कमाई करेंगे, हमारे अंदर कभी भी अहंकार नहीं आएगा। हम एक साधारण जीव की जिंदगी जी सकेंगे। हमारे आसपास एक अच्छा माहौल बनेगा। हमारे व्यवहार में एक अच्छाई छलकेगी। रूहानियत में हक-हलाल की कमाई बहुत जरूरी है।

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शाकाहारी भोजन के फायदे।

दूसरी बात है कि हमें शाकाहारी भोजन ही लेना है। शाकाहारी भोजन के बहुत फायदे होते हैं, एक तो सबसे बड़ी बात यह है कि हम किसी जीव की हत्या नहीं करते। और जो व्यक्ति मांसाहारी होता है वह दूसरे जीव को मार करके उसके मांस को खाता है, तो यह बहुत बड़ा पाप है। क्योंकि संतो के अनुसार परमात्मा हर किसी जीव के अंदर बैठा हुआ है। इसलिए हमें मांसाहारी ना बन करके, शाकाहारी बनना है।

बाबाजी के अनुसार मुसीबत में हर किसी जीव की सहायता करना सबसे बड़ी सेवा होती है। मुसीबत में फंसे जीव की सेवा करने से परमात्मा प्रश्न होते हैं। गुरु बहुत खुश होते हैं क्योंकि मन के अंदर सेवा भावना है। संत बार-बार बोलते हैं कि परमात्मा और गुरु को अगर प्राप्त करना है तो मन अंदर सेवा भावना बहुत जरूरी है। हमें अपने छोटे- बड़े, बुजुर्गों का सभी का आदर करना चाहिए। उनका मान-सम्मान करना चाहिए। संतो के अनुसार यही मनुष्य जन्म आखरी अवसर है जिसमें बैठकर कि आप भजन-सुमिरन करके परमात्मा को प्राप्त कर सकते हो। इसलिए ज्यादा से ज्यादा भजन सुमिरन करें। बिना ना करें और परमात्मा को प्राप्त करें।

।। राधास्वामी ।।

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