चौरासी के जेलखाने से छूटना है तो ये तो करना ही पड़ेगा

Radha Soami- संतो के मुताबिक अगर इसे चौरासी के जेलखाने से छूटना है। तो यह काम आपको करना पड़ेगा। क्योंकि कोई और रास्ता नहीं है कि जिससे आप परमात्मा को प्राप्त कर सको।

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बाबाजी क्यों जोर देते हैं भजन-सुमिरन पर

बाबा जी अपने सत्संग में भजन-सुमिरन पर बहुत जोर देते हैं। क्योंकि एक ही रास्ता है जिसके जरिए हम इस चौरासी के जेलखाने से छूट सकते हैं। इसलिए बाबाजी के वचनों पर अमल करो । सबसे पहले तो अपने अंदर नम्रता रखो, आदर भावना रखो, सबके प्रति एक अच्छी सोच रखो। क्योंकि जब तक अपने अंदर हर जीव के प्रति आदर, भाव, प्रेम, मान-सम्मान नहीं रखेंगे। हमारा मन झुकना नहीं सीखेगा।

सबसे पहले हमें अपने अंदर गुरु के प्रति प्रेम जागृत करना। हमारा प्रेम जागृत हो जाएगा, तब कहीं जाकर के हम परमात्मा के प्रति प्रेम अच्छी तरह पैदा कर सकते हैं। क्योंकि गुरु ही है वह रास्ता, वो बीच की कड़ी जो हमें परमात्मा से मिला सकते हैं। हमारा हाथ पकड़ के ले जाने वाला वह गुरु है। इसलिए हमें गुरु के प्रति प्रेम जागृत करना है।

हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम उन विचारों पर कैसे अमल

गुरु से ही हमें परमात्मा के घर जाने का रास्ता मिलता है क्योंकि गुरु जो होता है। उन्होंने अनुभव किया होता है कि परमात्मा को कैसे पाया जा सकता है और वही अनुभव हमारे सामने रखते हैं। उन्होंने कैसे परमात्मा को प्राप्त किया। वह सब हमें अच्छी तरीके से समझाते हैं। हमारे सामने पेश करते हैं। बाकी सब हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम उन विचारों पर कैसे अमल करते हैं।

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जब हमें प्रकाश दिखाई देता है

फिर हमें क्या करना है हमें गुरु से नाम दान की युक्ति प्राप्त करनी है और गुरु की हिदायत के अनुसार हमें भजन सुमिरन करना है क्योंकि भजन सुमिरन है जो हमारे लिव को परमात्मा से जोड़ती है हमें वह मधुर ध्वनि सुनाई देती है जो आनंद ही आनंद मिलता है वह भजन सुमिरन के द्वारा ही प्राप्त होता है जब हम अब भजन सुमिरन करते हैं तो हम अपना ध्यान तीसरे दिल पर लगाते हैं तो वहां पर हमें प्रकाश दिखाई देता है और हम एक मधुर ध्वनि सुनाई देती है जब हम उसे परमात्मा से मिलने के काबिल हो जाते हैं

।।राधास्वामी।।

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