चोर सज़ा से कैसे बचे? सत्संग की ये कैसी लीला: सतगुरु

Radha Soami – सत्संग की महिमा बहुत जबरदस्त है। अगर कोई उसके बारे में जानता है। बाबाजी सत्संग के जरिये ही हमें बहुत कुछ समझाते हैं। लेकिन हम गुरु के द्वारा बताई गई बातों पर विश्वास नहीं करते और ना ही उनकी बातों पर अमल करते हैं। सत्संग के जरिए ही हम एक अच्छा मुकाम हासिल कर सकते हैं। रूहानियत के रास्ते पर चलते हुए असल मुकाम पर पहुंच सकते हैं। हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं यानी कि परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं।

सत्संग कैसे कम करता है सजा

बाबाजी फरमाते हैं की सत्संग मनुष्य की दिशा बदल सकता है। मनुष्य की कठिनाइयों को कम कर सकता है। यहां तक की उसकी सजा को भी कम कर सकता है, खत्म कर सकता है। इतनी शक्ति होती है सत्संग में। इसलिए हमें कुछ समय या जब भी अवसर मिले, हमें सत्संग में जाना चाहिए और उस दौरान जो बातें बताई गई थी, हमें उन पर अमल करना चाहिए। हमें उन बातों को अपनी करने में जाहिर करना चाहिए।

हमें रूहानियत का रास्ता एक अच्छे गुरु के द्वारा ही प्राप्त हो सकता है। और अच्छा गुरु किसी सौभाग्यशाली जीव को प्राप्त होता है। पूर्ण संत सतगुरु हर किसी को प्राप्त नहीं होता। यह सब परमात्मा की मेहर होती है जिसके द्वारा किसी जीव को पूर्ण गुरु प्राप्त होते हैं और वही गुरु जीव को रुहानियत का रास्ता बतलाते हैं। और परमात्मा से मिलाप करने का तरीका बताते हैं। वह तरीका क्या होता है वह समय आने पर गुरु जीव को समय आने पर बता देते हैं। और जीव उस युक्ति पर अमल करते हुए परमात्मा में समा जाते हैं।

चोर की सज़ा हुई सूली से सुुल

बाबाजी अक्सर दो चोर की कहानी अपने सत्संग सुनाते हैं की सत्संग में जाने से कैसे एक चोर की सजा सूली से सूल में बदल गई। अगर वह चोर सत्संग में नहीं जाता, सत्संग सुनने नहीं बैठता तो वह फांसी पर लटका होता। सत्संग की वजह से ही वह चोर फांसी की सजा से बच गया। इतनी शक्ति होती है सत्संग में, इसलिए हमें सत्संग से जुड़ा रहना चाहिए और नामदान की युक्ति पर अमल करते रहना चाहिए ।

।।राधास्वामी।।

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