भजन-सुमिरन में क्या है? और हम इससे क्या फायदा उठा सकते हैं।

Radha Soami- भजन-सुमिरन में क्या है? और हम इससे क्या फायदा उठा सकते हैं। भजन एक ऐसी विधि है जिसके द्वारा हम परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। क्योंकि भजन-सुमिरन साधारण और एकमात्र ऐसा रास्ता है जिसकी द्वारा परमात्मा को पाया जा सकता है।

भजन-सुमिरन किसी पूर्ण गुरु से ही

हम किसी गुरु की शरण में जा करके उनसे नाम की दीक्षा प्राप्त करते हैं। जिसे हम भजन-सुमिरन कह कहते हैं। भजन-सुमिरन किसी पूर्ण गुरु से ही प्राप्त किया जा सकता है। जिन्होंने भक्ति करके परमात्मा को प्राप्त किया है और उस परम आनंद को महसूस किया है। जिसने इस विधि के द्वारा रूहानियत के रास्ते पर चलकर सुख और शांति प्राप्त की है।

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इससे माया के जाल से आजाद होने का एक ही रास्ता है, एक ही विधि है। जिसके द्वारा हम इस चौरासी के जेलखाने से छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं। इस विधि को केवल मनुष्य जन्म में ही अपनाया जा सकता है। और इस भजन-सिमरन की विधि को प्राप्त करने के लिए हमें कई तरह की बुराइयों को छोड़ना पड़ता है क्योंकि अगर बुरे कार्य हमारे साथ रहेंगे या हम करते रहेंगे तो इस विधि को हम नहीं प्राप्त कर सकते। यह कौन सी बुरी आदतें हैं? हम सभी जानते हैं।

मनुष्य को इन बातों का बहुत ध्यान रखना चाहिए।

मनुष्य को अपने अंदर नम्रता रखनी चाहिए, अपने अंदर सेवा-भावना रखनी चाहिए। हम जब एक-दूसरे से प्यार करेंगे, प्रेम करेंगे एक-दूसरे का आदर सम्मान करेंगे। तब हमारे मन में नम्रता तो आएगी, मन झुकना भी सीखेगा। तब कहीं हम अपने लिव को उस भजन-सुमिरन के द्वारा परमात्मा से जोड़ सकते हैं। हमें बुरे कार्य नहीं करने चाहिए। किसी का अनादर नहीं करना चाहिए। किसी जीव को परेशान नहीं करना चाहिए। किसी जीव की हत्या नहीं करनी चाहिए। जहां तक हो हमें बड़े-बुजुर्ग व्यक्ति की मदद करनी चाहिए। उनकी सेवा करनी चाहिए। जब भी कहीं हमें सेवा करने का अवसर प्राप्त हो हमें बड़ी खुशी के साथ सेवा करनी चाहिए।

ये रूहानियत में सबसे बड़ी बाधा है

हमें अपने जीवन में कभी भी नशे आदि नहीं करनी चाहिए, ना ही हमारे अंदर छल-कपट होना चाहिए। हमें मीट, मांस, अंडे आदि से भी दूर रहना चाहिए। क्योंकि दूसरे जीव का मांस खाना सबसे बड़ा पाप माना गया है। जोकि रूहानियत में सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए हमें इन सभी बुरी आदतों से दूर रहना चाहिए। हमें केवल सादा भोजन करना चाहिए। जिससे हमारे मन में और दिमाग में सही संतुलन बना रहे। बुरे विचार उत्पन्न ना हो। तब हम उस भजन-सुमिरन का फायदा उठा सकते हैं, परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं।

।।राधास्वामी।।

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