भजन-सिमरन के द्वारा ही अंदरुनी दर्शन संम्भव है: बाबाजी

Radha Soami -संत अपने अनुभव के अनुसार हमें रूहानियत के बारे में समझाते हैं। उनके हर सत्संग में केवल और केवल उस परमपिता परमात्मा की दर्शनों की बारे में
समझाते हैं। उनके दर्शन कैसे किए जाएं, उनकी दर्शन कैसे होते हैं, यही सब बातें हमें बार-बार संत-महात्मा उदाहरण दे देकर कर समझाते हैं। दर्शन कैसे होते हैं? कितने प्रकार की होते हैं? यही सब हम आज जानेंगे।
 
 
         दर्शन तीव्र और गहरे प्रेम का नतीजा है। जब हम बिना कोई कोशिश की सतगुरु की ओर टकटकी लगाकर देखने के लिए मजबूर हो जाते हैं; जब हम उनके आभा मंडल को, उनके नूर को देखकर मुग्ध हो जाते हैं, दंग रह जाते हैं। जब हम उनकी और इस तरह खींचे चले जाते हैं जैसे कोई सुई चुंबक की ओर, जब हम उनकी मौजूदगी में इतने लीन हो जाते हैं, खो जाते हैं मानो दुनिया ठहर गई हो और किसी दूसरी चीज की अहमियत नहीं रहती; जब कशिश इतनी जबरदस्त होती है कि उस पर हमारा वश नहीं रहता और हम अपने आसपास की हर चीज से बेखबर हो जाते हैं- यह भी दर्शन हैं।
          लेकिन हम सतगुरु की मौजूदगी और उनके दर्शन की गहराई को जज़्ब किए बिना एक जगह दर्शन करके दूसरी जगह दर्शन के लिए भागते-फिरते हैं। हम एक-दूसरे को धक्के देते हुए सत्संग पहुंचते हैं ताकि बैठने की बढ़िया से बढ़िया जगह मिल जाए और फिर भी सतगुरु के आने का इंतजार करते हैं।
और फिर …सत्संग शुरू होने के पाँच मिनट बाद हम बेशर्मी से उबासी लेने लगते हैं या हमें झपकी आने लगती है मानो सतगुरु ने हमारे बीच नींद की बीमारी फैला दी हो। हम सो जाते हैं। हम उनकी मौजूदगी में सो जाते हैं। हमें हमेशा लगता है कि हमारी नींद पूरी नहीं हुई है।
 
 
        लेकिन संत समझाते हैं कि ऐसे ही धक्का-मुक्की करने से उस परमात्मा को नहीं पाया जा सकता है। अगर हमें सच्चे दर्शन करने हैं तो हमें बाहरी दर्शन की वजह अंतर में दर्शन करने चाहिए। ज्यादा से ज्यादा हमें भजन-सिमरन करना है। एक वही असली और सच्चा रास्ता है। जिसके द्वारा हम अपने परमात्मा के दर्शन कर सकते हैं और वही असली दर्शन हैं। जिसके द्वारा हम इस भवसागर से पार हो सकते हैं।
                         राधास्वामी जी

Leave a Reply

Your email address will not be published.