बाबाजी ने बताया पाँच नाम का भेद और उनका महत्व :जानें

Radha Soami- बाबाजी हमेशा सत्संग में फ़रमाते हमेशा अपने मन को सिमरन में लगाये रखो। क्या इसकी कोई क़िमत चुकानी पङती है ? पाँच नाम का बहुत महत्व है। हर समय नाम का सिमरन करते रहो, जैसे छोटे बच्चे, एक, दो,तीन, चार दोहराते हैं। सिमरन एक बहुत बङी ताक़त है। इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। सिर्फ़ सिमरन से ही हमारे अंदर आत्मबल का विकास हो सकता है। सिमरन धीरज और दृढ़ता के साथ, बिना रूके करते रहना चाहिए। यह लगातार, बिना रूके, अटूट रुप से रूप से निरन्तर चलता रहना चाहिए।

तुम आओ हमारी गली

नाम का भेद ना जाने कोय

बहुत भारी भीड़ देखता हूँ। सभी को नाम चाहिए पर किसका नाम चाहिए ? और क्यों चाहिए ? क्या करोगे नाम का ?आप सभी को पता है परम पुरुष पूर्ण धनी हुजूर स्वामी जी महाराज ने फरमाया है की नाम में कोई शक्ति नहीँ, अगर जो नाम मे ही शक्ति होती तो हजारो रट रहे है। किसी का तो भला होता। परन्तु आपको समझना यह है कि हम चाहते क्या है। नाम आखिर है क्या? और किसका है, यूँ बहु तेरे नाम है, मेरा भी नाम है, आपका भी नाम है। सबका नाम है तो नाम से क्या होता है। नाम वही सच्चा है जो अनामी है। बाकी तो सब दुनियादारी के नाम है। संतमत में पांच नाम के सिमरन को
बताया गया है।

यह पांच नाम क्या है? किसके हैं और क्योँ हैं। सबसे पहले तो खुद से पूछो कि तुम्हें क्योँ चाहिए। खाली भीड़ लगा लेना यह कि नाम दे दो नाम दे दो। मेहर कर दो, दया कर दो। यह एक देखा देखी रीस बनती चली जा रही है और नाम का भेद पता नहीँ किसी को सभी को अपने भौतिक साधन को पूरा करने के लिए नाम चाहिए सोचते हैं कि नाम सिमरन से भौतिक, सांसारिक कष्ट-क्लेश और दुख दर्द दूर हो जाएंगे। सन्त बताते हैं यह तुम्हरी आँखों का धोखा है। यह सच्चे नाम का भेद अति भारी है। उसे संभाल पाना हर किसी के बस की बात नहीँ है।

बाबाजी

नाम की शक्ति का अहसास कैसे होता है

नाम की धार तो हर भौतिकता को काट देती है। जीव को निर्मोही बना देती है। जीव को यह दुनिया पराई लगने लगेगी। यहाँ मन नहीँ लगेगा। यह मन तो फिर जाएगा, यह देश पराया हो जाएगा। तुम अब हर वक्त तड़पते फिरोगे। घर वापसी की लौ जग जाएगी। तब यहाँ क्या करोगे यही है नाम का महत्व। नाम क्या है? पांच नाम दरसल रूहानियत मार्ग के पांच पड़ावो के नाम है।

पहला नाम जो तुम लेते हो वह तो ब्रम्हांड की एक स्थिति है। दूसरा नाम अक्षर ब्रह्म है। तीसरा नाम सुन्न पद का है। चौथा नाम भंवर गुफा का है और पांचवाँ नाम सतलोक में गाज़ रहा है। यही वह पांच नाम है जिन्हें तुम रट रहे हो। यह तो ऐसा ही है कि हम अपने लक्ष्य के रास्ते मेँ पड़ने वाले मुकाम को याद कर लें ताकि लक्ष्य से भटक ना जाएँ। परन्तु ये पड़ाव हमारे लक्ष्य नहीँ है, लक्ष्य तो हमारा परमात्मा प्राप्ति है। वह तो अनामी है। तब हमें यह समझ आता है की अनामी का नाम(परमात्मा) यही सच्चा नाम है। इस बात को समझना ज़रुरी है की जिसे तुम लिखते और पढ़ते भी हो और बोलते भी हो वह नाम तो वर्णात्मक हुआ।

सच्ची मुक्ति तो परमात्मा में एक रुप में

सच्ची और पूरी मुक्ति सच्ची मुक्ति तो परमात्मा में एक रुप होकर ही प्राप्त होती है। तो सतलोक पहुंचकर अब जबकि परमात्मा नाम का भेद प्रकट किया जा चुका हैं तो बिना अगम को पार किये किसी का भी सच्चा और पूरा उद्धार नहीँ हो सकता। जीव को चाहिए की अभ्यास में शब्द को सुनने पर अधिक तवज्जो दे। नाम सिमरन तो सिर्फ मन को एकत्रित करने और तीसरे तिल पर टिकाने के लिए बहुत जरूरी है। पर वह भी सच्चा और पूरा होना जरुरी है। इसलिए अपनी नजर मंजिल पर रखो, नामदान देना ये मालिक की मौज है।

आओ, सिमरन करें।

बाबाजी ने हम सब जीवों को अनेक बार समझाय है कि नाम भक्ति ही है जो हमें अपने असल घर ले जा सकता है। इसलिए हमें सदैव सिमरन करते रहना चाहिए। उठते-बैठते, चलते-फिरते, खाते-पीते कभी भी नहीं भूलना चाहिए। भजन-सिमरन चलता रहना चाहिए।

।।राधास्वामी।।

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