असलियत पहचानों। पहचान छुपाना नुकसान देह: बाबाजी

Radha Soami – संत महात्मा अपने सत्संग में अपनी वाणी में, अक्सर हमें समझाते रहते हैं कि भाई अपनी असलियत को पहचानो। अपने आपको पहचानो, अपनी पहचान को मत छुपाओ। अपनी पहचान को छुपाओगे तो बहुत ही नुकसान उठाओगे। इसलिए अपने आपको पहचानो आपने जिस काम के लिए आए हो उस काम को पूरा करो।

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अपनी असलियत को कैसे पहचानें

अब संत समझाते हैं कि हमें अपना पहचान कैसे हो? इसके लिए हमें किसी पूरे संत की शरण लेनी होगी। हमें किसी अभ्यासी गुरु की खोज करनी होगी जिसके द्वारा ही हम हम अपनी असलियत को पहचान सकते हैं। वही हमें वह युक्ति बताएंगे जिसके द्वारा हम अपने आप को पहचान सकते हैं। हम इस धरती पर किस लिए आए हैं, वह सब भी हम जान पाएंगे। इसलिए हमें किसी पूर्ण गुरु की खोज करनी है।

उल्लू और बाज़ की दोस्ती की कहनी जो बहुत कुछ कहती है।

महात्मा हमें एक कहानी के द्वारा समझाते हैं कि अगर हमने अपनी पहचान छुपाई, या अपनी पहचान को नहीं पहचाना तो हमें बहुत भारी नुकसान हो सकता है। महात्मा फरमाते हैं कि एक बार उल्लू और बाज में दोस्ती हो जाती है और दोनों आपस में बहुत बातें करते हैं। बाज ने उल्लू से कहा कि हम जब दोस्त बन ही गए हैं तो मैं आप पर कभी हमला नहीं करूंगा और ना ही कभी आपके बच्चों को खाऊँगा। लेकिन मेरी यह एक समस्या है कि मैं उनको पहचानूंगा कैसे की ये तुम्हारे बच्चे हैं?

महाराज चरण सिंह जी

उल्लू ने कहा बाज से कहा आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! मेरे बच्चों को पहचाना कौन-सा मुश्किल है। वह बहुत ही खूबसूरत है, उनके पंख बहुत ही चमकीले हैं और उनकी आवाज बहुत सुरीली और मीठी है।

कुछ समय बाद बाज उल्लू को यह कहकर वहां से चल पड़ा कि मैं अपने भोजन की तलाश में जा रहा हूं। बाज अपने भोजन की तलाश में एक पेड़ पर पहुंचा। पेड़ पर एक घोसला देखा है जिसमें बच्चे कर रहे हैं। बाज ने देखा कि उन बच्चों का रंग काला है, ना उनके पंख चमकीले हैं और ना उनकी आवाज सुरीली और मधुर है। बाज ने उन बच्चों को उल्लू के बच्चे ना करना समझ कर खा लिया।

यह देखकर हैरान जब बाज़ को देखा

इतनी देर में उल्लू उड़ता हुआ अपने घोंसले पर पहुंचा और बाज को देखा की उसने उल्लू के बच्चों को खा लिया है तो बाज से कहने लगा कि दोस्त तुने ये क्या किया। तूने मेरे बच्चों को खा लिया। बाज यह सुनकर हैरान था। उसने कहा कि तुमने दोस्ती को भी धोखा दिया है। तुमने अपने बच्चों की पहचान छुपाई और यह कहकर बाज वहां से उठ गया।

उल्लू वहां बैठकर मातम मना रहा था। तभी एक कौआ वहां आया और कहने लगा कि अब मातम मनाने से, रोने से क्या फायदा। तुमने झूठ बोला अपनी पहचान छुपाई उसकी सजा तुम्हें मिली है। उस पर रोने से कोई फायदा नहीं

इसीलिए संत महात्मा कहते हैं कि भाई अपनी पहचान ना छुपाओ। अपने आप को पहचानो। अगर आप अपनी पहचान छुपाओगे, सत्य को नहीं पहचानोगे तो बहुत बड़ा नुकसान होगा। आप अपने आप को धोखा दे रहे हो । हम सब किसी पूरे सतगुरु के पास जाएं, अपने आप को पहचाने, नामदान की युक्ति प्राप्त करें और अपनी निजी घर वापसी करें।

।।राधास्वामी।।

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