अपने दुःखों को दूर करना है तो करें ये आसान काम: बाबाजी

Radha Soami- बाबा जी फरमाते हैं हमें अपने जीवन को इस तरीके से जीना है कि हमें दुख का एहसास ना हो। हमें सदैव हंसी-खुशी से अपने जीवन को व्यतीत करना चाहिए। अगर कुछ लगता है कि हमें कुछ गम, कुछ दुख, दर्द है तो उसको व्यक्त ना करें, क्योंकि व्यक्त करने से दुख बढ़ जाता है। वह कम होने का नाम नहीं लेता।

बाबाजी

सब कर्मों का बोझ

संतो के मुताबिक सुख और दुख सिक्के के दो पहलू के समान है। जैसे एक सिक्का जब उछाला जाता है तो वह कभी हैड कभी टैल आता है। परंतु वह एक जगह खड़ा नहीं रह सकता। उसी तरीके से हमारा जीवन है। हम अपने जीवन में भी में कभी दुख सहन करते हैं तो कभी सुख सहन करते हैं। कभी दुख का अनुभव करते हैं। तो उस समय को हमें परमात्मा की, कुलमालिक की आज्ञा समझ कर उस जीवन को बड़ी नम्रता के साथ जीना है। कभी भी उसमें कोई कमी ना निकाले, क्योंकि जो कर्म हमने किए हैं उसका फल तो भोगना ही पड़ेगा।

दुःख

इस इस जीवन में जो व्यक्ति सुख का अनुभव कर रहा है। वह व्यक्ति अच्छे कर्मों की बदौलत सुख अनुभव कर रहा है। उसने पिछले जन्म में कुछ अच्छे कार्य किए होंगे, पुण्य का काम किया होगा। उसी के अनुसार एक अच्छा जीवन व्यतीत कर रहा है और जो व्यक्ति कुछ दुख की घड़ियां व्यतीत कर रहा है। उसमें किसी दूसरे का दोष नहीं है। सब उसके कर्मों का बोझ है, वह बोझ उसी को उठाना पड़ेगा। हां’ कुछ अच्छे कर्म करके उसको हल्का जरूर कर सकता है।

दुःख दूर करने लिए पूर्णगुरू की खोज

बाबाजी

जीव अपने कर्मों का बोझ हल्का कर सकता है। उसके लिए मनुष्य को चाहिए कि वह एक अच्छे और सच्चे गुरु की शरण में जाये। उसे पूर्णगुरु की आवश्यकता है और मनुष्य को उसकी खोज करनी चाहिए। जब मनुष्य किसी सच्चे, रूहानियत के ज्ञाता, पहुंचे हुए गुरु की खोज कर लेगा तो कर्मों का बोझ आसानी से कट जाएगा। परंतु दुख भोगने ही पड़ेंगे। हां’ यह संभव है की सतगुरु की शरण में जाने से उन दुखों का आसानी से निवारण हो जाएगा।

हमें चाहिए कि पूर्णगुरु की खोज करके उनसे रूहानियत के रास्ते पर चलने के तरीके जानने चाहिए। उनसे नामदान की युक्ति प्राप्त करनी चाहिए। भजन सिमरन करना चाहिए ताकि हम उस रूहानियत के पथ पर आसानी से बढ़ते रहें और दुखों से पार हो जाए। इसके लिए हमें गुरु के हुकुम में चलना है। उनके बताए गए रास्ते पर चलते हुए सेवाभाव के साथ भजन-सिमरन करते रहना है। ताकि हमारा मनुष्य जन्म में दुखों का बोझ कम हो जाए।

आइये’ सुमिरन करें।

हम इस मनुष्य जन्म को पार करके जीत हासिल कर सकते हैं। हम भजन-सिमरन करके इस मनुष्य जन्म का फायदा उठा सकते हैं और अपने नीजघर जा सकते हैं। गुरु की बड़ी असीम कृपा के बाद हमें यह मनुष्य जन्म मिला है। चौरासी लाख योनियों के दुख भोगते हुए हम आज मनुष्य जन्म में आए हैं। इसलिए हमें इसका लाभ उठाना है। गुरु से प्राप्त नाम की युक्ति को जपते रहना है। ज्यादा से ज्यादा भजन-सुमिरन करना है। बिना ना करना है और परमपिता परमात्मा प्राप्त करता है।

।। राधास्वामी।।

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