आध्यात्मिक खोज में सभी संतों का एक ही निष्कर्ष, परमात्मा को केवल?

Radha soami – बाबाजी के अनुसार जितनी भी संत महात्मा हुए हैं। वे अपनी आध्यात्मिक खोज में सभी संत एक ही निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। परमात्मा एक है। सभी संतो का एक ही मत है और सभी संतों का एक ही अनुभव है, उद्देश्य है। सभी संतो ने परमात्मा को पाने का एक ही तरीका बताया है। अपने निजघर कैसे पहुंचा जाए, मनुष्य जन्म का कैसे लाभ उठाया जाए, सभी का एक ही मत है।

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केवल मनुष्य ही कर सकता है परमात्मा को

संत बतातेे हैं “परमेश्वर” एक है। केवल मनुष्य ही उससे मिल सकता है और इसके लिए उसे सत्य, संतोष, क्षमा तथा शील आदि गुणों को धारण करना पड़ता है। मनुष्य प्रभु को अपने अंतर में ही पा सकता है, बाहर नहीं मिलता। प्रभु को अपने अंदर ही प्राप्त कर सकते हैं। प्रभु से मिलने का साधन सुरत को तीसरे तिल में पूरी तरह एकाग्र करके, मन को अंतर स्थिर करके शब्द से जोड़ना है। जिसके द्वारा परमात्मा की प्राप्ति संभव है।

बाबा गुरिंदर सिंह जी

सभी महात्माओं का यह भी मानना है कि यह तभी संभव है, जब प्रभु को स्वीकार हो की आत्मा सचखंड लौट आये। साधु-संतों की संगति में आकर शब्द के साथ जुड़ना ही सबसे श्रेष्ठ कर्म है, परंतु शब्द से मिलाप तभी होता है जब भाग्य में लिखा हो।

गुरु अर्जुन देव जी का कथन है :

हर कीरत साधसंगत है सिर करमन कै करमा।।

कहो नानक तिस भइओ परापत जिस पुरब लिखे का लहना।।

आप समझाते हैं कि संत-सतगुरु की बिना न भक्ति हो सकती हैं और न नाम से प्रेम होता है। गुरु नानक देव जी बार-बार उपदेश देते हैं कि अपने मन को बाहर जाने से रोको और अंतर में खड़ा करके सर्वव्यापक नाम के साथ जोड़ो। यदि हम इस उपदेश पर नहीं चलेंगे, तो हमें यमदूत के हाथों कष्ट भोगना पड़ेगा। इस से अच्छा है कि हम अपने सतगुरु की शरण में बने रहे और उनके हुकम में चले और उनके बताए गए नाम धुन, शब्द धुन, नामदान की युक्ति पर अमल करें। भजन सुमिरन करें।

।।राधास्वामी।।

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