रूहानियत में सतगुरु के बिना कोई सहयोगी नही: बाबाजी

Radha soami- बाबाजी अपने सत्संग में बार-बार फ़रमाते रहते है कि भजन सिमरन बहुत जरूरी है। बीना इसके कुछ भी नही है। और यही आखिरी मौका है। इसके बाद आपको ये मनुष्य जन्म नही मिलेगा।

भले ही हजारों सूर्यों का प्रकाश हो जाए, लेकिन रूहानी मार्ग में सतगुरु के बिना हम अज्ञानता और अंधकार में है। बिना सतगुरु के मुक्ति कभी नहीं मिल सकती।

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सतगुरु का कार्य
सतगुरु का कार्य है हमें उपदेश की याद दिलाना और भजन-सिमरन द्वारा हमारा ध्यान और परम ज्ञान की ओर, उसकी पहचान की ओर ले जाना जो रूहानियत का मूल स्त्रोत है, क्योंकि भजन-सिमरन ही हमारे आंतरिक अभ्यास की बुनियाद है।

नामदान से हर मुक़ाम हासिल
सतगुरु हमें वह युक्ति बताते हैं जिससे शिष्य की आत्मा एकाग्र होकर अंतर में जुड़ जाती है। वह हमें सिखाते हैं कि कैसे मन को एकाग्र करके सतगुरु के स्वरुप पर ध्यान टिकना आना है। और कैसे उस परमपिता परमात्मा को पाना है। यही सतगुरु का सीधा साधा उपदेश है।

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