रूहानियत में इन बातों पर ध्यान रखना बहुत जरूरी है : बाबाजी

Radha Soami- संतों की शरण किसी क़िस्मत वाले को मिलती है। और जो इंसान संतों की शरण में चला जाता है। समझो उसका परमात्मा से मिलने का रास्ता साफ हो गया। वो इंसान अपने संत-सतगुरु से नाम की युक्ति प्राप्त करके, रूहानियत की राह पर चल कर अपने जीवन को सार्थक कर सकता है।

हक हलाल की कमाई पर गुजारा 

संत हमेशा रूहानियत के रास्ते पर चलने की नेक सीख बतलाते हैं। हमें सत्य पर चलना और हक हलाल की कमाई पर गुजारा करने की प्रेरणा देते हैं। क्योंकि हक हलाल की कमाई से हमारा मन ज्यादा विचलित नहीं होता, वह सही राह पर रहता है। इसलिए हमें हक हलाल की कमाई पर गुजारा करना चाहिये।
एक रूहानियत की खास कला

हमें अपना व्यवहार बिल्कुल शांत स्वभाव में रखना चाहिये। जितना हम शांत स्वभाव में रहेंगे, उतना ही हमारा मन एकाग्र होगा। और आसपास में अपना वातावरण भी खुशनुमा रहेगा। हर व्यक्ति के साथ बड़ी नम्रता से पेश आना चाहिए। यह एक रूहानियत की खास कला है, जिसके जरिए हम मन को एकाग्र करने में बहुत बड़ी सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
भजन-सुमिरन का उचित समय कौन सा?

भजन-सुमिरन हमें समय पर करना चाहिए। उचित समय कौन सा है? उचित समय सुबह का होता है, क्योंकि उस समय हम बहुत ही तरोताजा महसूस करते हैं और हमारा मन भी शांत होता है। 
उस समय अगर हम अब भजन सुमिरन पर बैठते हैं तो हमारा ध्यान एकाग्र होगा और परम पिता परमात्मा के चरणों में जल्द ही लगेगा और हम उस परमपिता को प्राप्त कर सकते हैं। बाकी किसी भी समय हम भजन-सुमिरन कर सकते हैं। लेकिन सुबह का समय बहुत ही शांत होता है इसलिए सुबह के समय को महत्व देते हैं।
                   राधास्वामी

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